रायपुर , दिसंबर 17 -- ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का जल संसाधन विभाग उपलब्धियों के नए मानक स्थापित करने में सफल रहा है। सिंचाई क्षमता के विस्तार से लेकर जल संरक्षण, जल भंडारण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण तक विभाग ने बहुआयामी प्रगति दर्ज की है।
यहां बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार पिछले दो वर्षों में प्रदेश की विकसित सिंचाई क्षमता में लगभग 25 हजार हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जिससे कुल सिंचित क्षेत्र 21.76 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही 14 नई बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनके पूर्ण होने पर करीब एक लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य की जल भंडारण क्षमता को 7,900 एमसीएम से बढ़ाकर 16,000 एमसीएम करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
विज्ञप्ति के अनुसार जल शक्ति अभियान 'कैच द रेन' के तहत समुदाय आधारित जल संचयन प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार (द्वितीय स्थान) से सम्मानित किया गया, जबकि नगरीय निकाय श्रेणी में रायपुर नगर निगम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा बालोद, राजनांदगांव, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मान मिला।
वहीं, प्रदेश में 73,601 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और पुनर्स्थापन के लिए 477 योजनाओं को मंजूरी दी गई, जिन पर लगभग 1,875 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। विशेष केंद्रीय सहायता के अंतर्गत राज्य गठन के बाद पहली बार लगभग 896 करोड़ रुपये की केंद्रीय मदद प्राप्त हुई। वर्ष 2024-25 में खरीफ और रबी फसलों के लिए निर्धारित सिंचाई लक्ष्य का लगभग 88 प्रतिशत हासिल किया गया।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि वर्षों से लंबित भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक तथा वन भूमि क्षतिपूर्ति के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई, जिससे कई अटकी हुई परियोजनाओं को गति मिली। अटल सिंचाई योजना के तहत 115 लंबित सिंचाई योजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जा रहा है।
विज्ञप्ति के अनुससार बस्तर क्षेत्र में सिंचाई विकास को मजबूती देने के लिए जगदलपुर में मुख्य अभियंता कार्यालय की स्थापना की गई। वहीं जशपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र में कुनकुरी में नए कार्यपालन अभियंता और अनुविभागीय कार्यालय प्रारंभ किए गए। विभाग में 83 सहायक अभियंताओं की नियुक्ति भी की गई है।
वहीं, मयाली बांध में पर्यटन एवं नौकायन सुविधाओं का शुभारंभ किया गया, वहीं गंगरेल बांध में 'जल जागर महोत्सव' जैसे आयोजन हुए। जल निकायों के पुनरोद्धार के लिए बेमेतरा जिले को वैश्विक स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ।
विज्ञप्ति सरकार द्वारा नई सिंचाई परियोजनाओं के सर्वेक्षण, वर्षा जल के उपयोग, नदी जोड़ो योजनाओं और बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना जैसे बड़े कार्यों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही गाद प्रबंधन, बांध परिसरों में पर्यटन विकास और 'जल विजन दस्तावेज 2047' के माध्यम से दीर्घकालीन जल प्रबंधन की रूपरेखा तैयार की गई है।
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