तिरुवनंतपुरम , फरवरी 02 -- दोषी अपराधियों को कथित तौर पर मनमाने ढंग से पैरोल दिए जाने के मुद्दे पर सोमवार को केरल विधानसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के नेतृत्व में विपक्ष ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस खारिज किए जाने के बाद सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए बर्हिगमन किया।
सदन में इस दौरान तीखी नोकझोंक, नारेबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माहौल रहा। विपक्ष ने सरकार पर "पैरोल के दुरुपयोग" का आरोप लगाते हुए स्थगन प्रस्ताव के जरिए तत्काल बहस की मांग की थी। विपक्ष का दावा था कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े दोषी अपराधियों को लाभ पहुंचाने के लिए पैरोल का चयनात्मक उपयोग किया जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष ए. एन. शमसीर ने हालांकि नोटिस को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला तात्कालिकता की श्रेणी में नहीं आता और इसे नियमित प्रक्रिया के तहत उठाया जा सकता है। अध्यक्ष के इस फैसले के बाद विपक्षी विधायक तख्तियां और बैनर लेकर सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार पर "अपराधियों से डरने" तथा राजनीतिक संबद्धता वाले दोषियों को पैरोल देने का आरोप लगाया।
नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के बीच विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि सजा सुनाए जाने के बेहद कम समय के भीतर पैरोल दी जा रही है। उन्होंने ऐसे मामलों का हवाला दिया, जिनमें 20 साल की सजा पाए दोषियों को महज एक महीने के भीतर पैरोल पर रिहा कर दिया गया।
श्री सतीशन ने यह भी दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के आलोचकों को डराने के लिए पैरोल का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व माकपा नेता और बाद में पार्टी के आलोचक बने श्री वी. के. कुन्हिकृष्णन के मामले का भी उल्लेख किया। सत्तारूढ़ पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। स्थानीय स्वशासन मंत्री एम. बी. राजेश ने पैरोल प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है और अंतिम बार पैरोल 8 जनवरी 2026 को दी गई थी।
श्री राजेश ने विपक्ष पर पूर्व नियोजित प्रदर्शन का आरोप लगाते हुए कहा कि वे पहले से बैनर लेकर सदन में आए थे, क्योंकि उन्हें मालूम था कि स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह केंद्रीय बजट पर होने वाली चर्चा से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है, जिससे परोक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रीय पार्टियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
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