नयी दिल्ली , दिसंबर 29 -- कांग्रेस ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की चीनी कहकर हत्या किए जाने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मामले की गहन जांच कर दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है।

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देहरादून में पूर्वोत्तर से पढ़ने आये त्रिपुरा के एंजेल चकमा की गुंडों ने पीटकर हत्या कर दी। उसे चीनी कहा गया और आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस ने 12 दिन तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की आखिर जब स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे तो प्राथमिकी दर्ज की गयी। उनका कहना था कि इस मामले की जांच होनी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जब युवक की पिटाई हो रही थी तो उसके शब्द थे "मैं भारतीय हूं। मैं चीन से नहीं आया हूं। मैं भारतीय हूं, चीनी नहीं। पूर्वोत्तर के लोग भारतीय हैं, चीनी नहीं। ये शब्द 9 दिसंबर को त्रिपुरा के 24 साल के युवक एंजेल चकमा को देहरादून में कहने पड़े जब उसकी पिटाई हो रही थी। एक दिन जब एंजेल चकमा अपने भाई के साथ बाजार से वापस आ रहे थे, तभी हमेशा की तरह कुछ लोगों ने उसको छेड़ा और उसे चाइनीज कहा। उस दिन एंजेल ने जवाब देते हुए कहा-मैं भारतीय हूं, मैं चीनी नहीं हूं। मैं भारतीय होने का क्या प्रमाण दूं। एंजेल चकमा ने जब यह जवाब दिया तो 5 लोगों ने उस पर पीछे से वार कर उसकी हत्या कर दी। एंजेल 14 दिन तक जिंदगी के लिए लड़ा लेकिन अफसोस की बात है कि वह अब हमारे बीच नहीं है।"कांग्रेस नेता ने कहा कि एंजेल चकमा के साथ हुई हिंसा में कुछ ऐसी जानकारियां आई हैं, जो बेहद चिंताजनक है। एंजेल चकमा के परिवार के सदस्यों ने बताया कि स्थानीय पुलिस को प्राथमिकी और शिकायत दर्ज करने में पुलिस ने तत्परता नहीं दिखाई। प्राथमिकी दर्ज करने में लगभग 12 दिन लग गए। जब छात्रों ने प्रदर्शन किया, तब जाकर प्राथमिकी दर्ज की गयी है और इस मामले में शायद चार लोग गिरफ्तार हुए है, लेकिन मुख्य व्यक्ति भाग गया। यह चिंता का विषय है कि पूर्वोत्तर के लोग जब पुलिस थाने में जाकर शिकायत करते हैं तो पुलिस मामले को रफा दफा कर देते हैं।

उन्होंने कहा "यह मामला उत्तराखंड का ही नहीं है, ऐसी घटना असम में भी हो रही है जहां कर्बी जिले के आदिवासियों को 'कार्बी चीनी' कहकर गो बैक की बात कर रहे हैँ। यह गंभीर मामला है और इस पर मंथन और चिंतन की जरूरत है और इस व्यवहार को बदलने को लेकर सरकार को विचार करना चाहिए। इसके लिए पूर्वोत्तर के साहित्य और गीत को समझाने की जरूरत है और पूर्वोत्तर के लोगों की संस्कृति की जानकारी लोगों को दी जानी चाहिए। पूर्वोत्तर के लोग देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा के लिए जाते हैं और वे शिक्षा तो ग्रहण करते हैं लेकिन जान भी गंवा रहे हैँ।

उन्होंने घटना की जांच पड़ताल करने की मांग करते हुए कहा कि घटना के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और इस बात की भी जांच हो कि पुलिस ने प्राथमिकी में देर क्यों की। लोगों में सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है।

श्री गोगोई ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग शिक्षा के लिए देश के अलग-अलग कोने में जाते हैं और एंजेल चकमा भी पढ़ाई के लिए उत्तराखंड गया था। एंजेल चकमा को शिक्षा तो मिली, लेकिन जान भी गंवानी पड़ी। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए, ताकि लोग उसके खर्चे पर नॉर्थ ईस्ट जाएं। लोग एंजेल के गांव जाएं और देखें कि वहां कई पुराने शिव मंदिर हैं और काफी पुरानी संस्कृति है। लोग यह भी जानें कि असम की कनकलता बरुआ जी ने 'भारत छोड़ो आन्दोलन' के समय तिरंगा लहराते हुए बलिदान दे दिया। समाज में ऊंच-नीच के रुतबे को बदलने की जरूरत है और इस पर सरकार को विचार करना चाहिए।

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