नयी दिल्ली , जनवरी 30 -- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य नीति में ऐतिहासिक बदलाव आया है और देश इलाज-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन (प्रिवेंटिव व प्रमोटिव हेल्थकेयर) की ओर अग्रसर हुआ है।

उन्होंने यह बात यहां राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

श्री नड्डा ने महिला-नेतृत्व वाले विकास को भारत की प्रगति की कुंजी बताते हुए कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य, सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की 34 वर्षों की यात्रा यह दर्शाती है कि किसी भी संस्था की पहचान केवल कानून से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों से बनती है।

श्री नड्डा ने कहा कि वर्ष 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत भारत ने एक समग्र स्वास्थ्य मॉडल अपनाया है, जिसमें रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और पालीएटिव केयर (लाइलाज बीमारियों से पीड़ित मरीजों की देखभाल) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में स्थापित 1.81 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर आज 140 करोड़ नागरिकों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिनमें मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य को विशेष महत्व दिया गया है।

श्री नड्डा ने बताया कि केंद्र सरकार गर्भधारण से लेकर बच्चे के 16 वर्ष की आयु तक निरंतर स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित कर रही है और यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2.5 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.5 करोड़ बच्चों की निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से 2024 के बीच 7.5 करोड़ से अधिक प्रसव-पूर्व जांचें की गईं, जबकि संस्थागत प्रसवों में पिछले एक दशक में 89 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

श्री नड्डा ने कहा कि देश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) वर्ष 2014-15 में 130 से घटकर अब 88 प्रति लाख जीवित जन्म रह गई है। यह उपलब्धि मजबूत स्वास्थ्य तंत्र और जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं के प्रयासों का परिणाम है।

श्री नड्डा ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से अब तक 40 करोड़ लोगों की हाईपरटेंशन और डायबिटीज जांच, करोड़ों कैंसर स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिससे बीमारियों की शुरुआती पहचान और समय पर इलाज संभव हुआ है।

श्री नड्डा ने टेली-मानस सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 20 भाषाओं में 24 घंटे सातों दिन मानसिक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध करा रही है, जिससे महिलाओं को बिना झिझक सहायता मिल रही है।

श्री नड्डा ने 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान' का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें देशभर की 11 करोड़ से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और गैर-संचारी रोगों की व्यापक जांच की गई।

कार्यक्रम में एनसीडब्ल्यू की पत्रिका 'जागृति', मातृत्व लाभ अधिनियम पर हैंडबुक, प्री-मैरिटल डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल, महिला वैज्ञानिकों पर कैलेंडर तथा 'आंगन से अंतरिक्ष' थीम के तहत महिला अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।

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