चंडीगढ़ , दिसंबर 22 -- राष्ट्रीय राज्य कृषि विपणन बोर्ड परिषद के अध्यक्ष हरचंद सिंह बरसट ने सोमवार को दिल्ली में आयोजित 'ताजा उपज पुनर्प्राप्ति की क्षमता को उजागर करना' विषय पर राष्ट्रीय संवाद में कहा कि भारत में खाद्यान्न, फल और सब्जियों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, जो देश के किसानों के अथक परिश्रम का परिणाम है। लेकिन इतने बड़े उत्पादन के बावजूद, इसका लगभग 30 प्रतिशत बर्बाद हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यह बर्बादी न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनती है , बल्कि कई प्रकार की बीमारियों को भी जन्म देती है और सामाजिक समस्याओं को भी बढ़ाती है। इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करने और उपयुक्त समाधान खोजने के लिए सभी को एक साथ आने की आवश्यकता है।
श्री बरसट ने कहा कि यदि इस कचरे का उचित प्रबंधन किया जाये, तो इससे कई लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं। कचरे से बायोगैस , ऊर्जा आदि का उत्पादन किया जा सकता है। इसके अलावा इसका उपयोग खाद बनाने के लिए कृषि में किया जा सकता है । इस तरह, कचरा समस्या बनने के बजाय एक उपयोगी चीज बन जाता है। स्रोत किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खाद्यान्न, फल, सब्जियां आदि के उत्पादन को बर्बाद होने से बचाने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि यह जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
अध्यक्ष ने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाकर नयी सड़कें बनाई जा सकती हैं। भारत में हर तरह की सुविधाएं मौजूद हैं, उपजाऊ भूमि , रेतीले क्षेत्र , पहाड़ , समुद्र और विभिन्न प्रकार की जलवायु। फिर भी, भारत पिछड़ा हुआ है क्योंकि हम इनका सही प्रबंधन नहीं कर रहे हैं। कचरे का प्रबंधन करने के बजाय, हम उसे एक समस्या बनने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपशिष्ट प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए और इस समस्या से निपटने के लिए उपयुक्त समाधान खोजने चाहिए तथा सामाजिक बुराइयों को दूर करने में योगदान देना चाहिए।
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