नयी दिल्ली , फरवरी 16 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में एयरो इंजन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बेहद जरूरी बताते हुए कहा है कि देश में एयरो इंजनों के विकास को प्राथमिकता देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्री सिंह ने सोमवार को बेंगलुरु स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (जीटीआरई) का दौरा किया और स्वदेशी सैन्य गैस टरबाइन इंजन विकास से सम्बंधित परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्हें प्रतिष्ठान की निर्माणाधीन परियोजनाओं, भारतीय उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ हुए संवाद और रक्षा बलों को प्रदान किए जा रहे समर्थन के बारे में जानकारी भी दी गई। उन्होंने विभिन्न स्वदेशी इंजनों और उनके पुर्जों की प्रदर्शनी का भी दौरा किया और कावेरी इंजन के पूर्ण आफ्टरबर्नर परीक्षण को देखा।
रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बातचीत करते हुए आत्मनिर्भरता से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों के लिए जीटीआरई की सराहना की और डीआरडीओ को देश की रणनीतिक क्षमता का आधार बताया। उन्होंने तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में एयरो इंजन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के महत्व पर बल दिया और कहा कि देश में एयरो इंजनों के विकास को प्राथमिकता देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में परिवर्तन आ रहा हैं और नए इकोसिस्टम विकसित हो रहे हैं। स्वदेशी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों वाले राष्ट्र सुरक्षित, संरक्षित और आत्मनिर्भर बने रहेंगे। उन्होंने सरकार की प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।
जीटीआरई के महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र में हुए प्रयासों के बारे में श्री सिंह ने प्रयोगशाला से आग्रह किया कि वह एक राष्ट्रव्यापी मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण करते हुए अगली पीढ़ी के इंजनों पर ध्यान केंद्रित करे और साथ ही एयरो इंजनों में आत्मनिर्भरता हासिल करे। उन्होंने कहा ," हम उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) के डिजाइन और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हमने अतीत में एयरो इंजनों के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के कई प्रयास किए हैं। अब उन प्रयासों को पूरा करने का समय आ गया है। हम खुद को केवल पांचवीं पीढ़ी के इंजनों तक सीमित नहीं रख सकते । हमें जल्द से जल्द छठी पीढ़ी की उन्नत तकनीकों का विकास शुरू करना होगा। इन पर शोध समय की मांग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और नई सामग्रियों का उपयोग बढ़ रहा है। हमें इस क्षेत्र में अग्रणी बने रहना होगा।"रक्षा मंत्री ने एयरो इंजन के विकास को एक अत्यंत जटिल कार्य बताते हुए कहा कि विकसित देशों को भी अगली पीढ़ी के इंजन विकसित करने में अक्सर 25 से 30 साल लग जाते हैं, और उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों से देश की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समयसीमा को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमें यह मानकर चलना होगा कि 20 साल बीत चुके हैं और अब हमारे पास केवल 5-7 साल बचे हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय आकांक्षाओं के अनुरूप कार्रवाई का आह्वान बताया।
ऑपरेशन सिंदूर की बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान रक्षा बलों ने रक्षा क्षेत्र में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि संचार प्रणाली हो, निगरानी उपकरण हों या आक्रमण हथियार, सब कुछ स्वदेशी था। इससे हमारे सैनिकों का मनोबल बढ़ा और नागरिकों में गर्व की भावना पैदा हुई। बदलती चुनौतियों को देखते हुए, स्वदेशी पद्धतियों पर अधिक ध्यान देना और अपनी सेनाओं को विश्व स्तरीय प्रणालियां और उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
रक्षा मंत्री ने एयरो इंजन विकास के लिए ब्रिटेन के साथ संयुक्त अध्ययन की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एयरो इंजन मिशन के तहत फ्रांस के साथ भी एयरो इंजन के लिए यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन दोनों ही एयरो इंजन प्रौद्योगिकी में काफी उन्नत हैं। ये सहयोग न केवल हमें नई प्रौद्योगिकियों को सीखने का अवसर प्रदान करेंगे, बल्कि पिछले दशकों में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों को समझने में भी मदद करेंगे।
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