सीहोर , फरवरी 7 -- मध्यप्रदेश में सीहोर जिले के अमलाहा स्थित इकार्डा परिसर में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय दलहन सम्मेलन भारतीय कृषि के भविष्य को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। खेतों के बीच आयोजित इस सम्मेलन में देश के नौ राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, वैज्ञानिक, नीति विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान एक मंच पर एकत्रित हुए। सम्मेलन को आत्मनिर्भर दलहन भारत की दिशा में मंथन का मंच बताया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ किया। सम्मेलन की सबसे बड़ी घोषणा 'बीज ग्राम' योजना रही। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विदेशों से दाल आयात करना गर्व नहीं, बल्कि चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि विश्व में नेतृत्वकर्ता बनाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 27 देशों से समझौते किए, लेकिन किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज ग्राम योजना से गांव-गांव में उन्नत बीजों का उत्पादन होगा, जिससे किसानों की लागत घटेगी और गुणवत्ता बढ़ेगी। उन्होंने आदर्श खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने देशभर में 1000 नई दाल मिलें स्थापित करने की घोषणा की, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी।

केंद्रीय मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन खरीदी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि तुअर 8000 रुपये, उड़द 7800 रुपये, चना 5875 रुपये और मसूर 7000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी जाएगी। उन्होंने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक किसानों की चिंता सरकार करेगी। सम्मेलन के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मिलकर दलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश को 354 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश आज भी देश में दलहन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, हालांकि क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से दो कदम आगे रहकर दलहन-तिलहन मिशन को सफल बनाएगी।

डॉ. यादव ने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे खातों में दी गई है। उन्होंने कहा कि सिंचाई क्षेत्र को 7.5 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है, जिससे किसानों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है।

सम्मेलन के दौरान प्लांट जीनोमिक्स, टिश्यू कल्चर, प्लांट ब्रीडिंग और प्लांट पैथोलॉजी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का लोकार्पण किया गया। साथ ही प्रशासनिक भवन और किसान प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन हुआ। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन प्रयोगशालाओं में मौसम एवं रोग प्रतिरोधी बीजों पर अनुसंधान किया जाएगा, जिससे दलहन की उत्पादकता बढ़ेगी।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया तथा उन्नत बीज किट प्रदान की गई। पल्सेस मिशन पोर्टल के माध्यम से किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तकनीकी जानकारी और योजनाओं का लाभ मिलेगा।

सम्मेलन के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अमलाहा की धरती से उठी यह पहल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विज्ञान, नीति और किसानों की मेहनत के समन्वय से भारत को दलहन आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम सिद्ध होगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित