नयी दिल्ली , मार्च 17 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया के संकट के कारण देश में रसोई गैस सिलेंडर की कमी को लेकर मचे शोर के बीच मंगलवार को कहा कि इस समय देश में कुल मिलाकर "ऊर्जा की कोई कमी नहीं है" और सरकार एलपीजी के घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ा रही है।
श्रीमती सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान मांगों की दूसरी किस्त से संबंधित विनियोग विधेयक 2026 पर राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि रसोई गैस (एलपीजी) की घरेलू खपत का एक प्रमुख हिस्सा आयात किया जाता है और इस आयात का बड़ा हिस्सा होर्मूज जलडमरूमध्य के मार्ग से आता है। उन्होंने कहा, "एलपीजी क्षेत्र में भी हम लगातार क्षमताओं का निर्माण कर रहे हैं, और इस समय जिस तरह से हमने घरेलू एलपीजी क्षमता बढ़ाई है, वह अब काम आ रही है।"उन्होंने कहा कि अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच में की गयी प्रमुख मांगे बाहरी संकट से उत्पन्न स्थितियों को ध्यान में रखकर प्रस्तुत की गयी हैं। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत कुल 2.81 लाख करोड़ रुपये की अनुपूरक अनुदान मांगों और तत्संबंधी विनियोग विधेयक को लोकसभा ने पहले ही पारित कर दिया था। राज्यसभा में इस पर चर्चा की औपचारिकता पूरा कर इसे यथा स्वरूप लोकसभा को लौटा दिया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने आठ मार्च को घरेलू रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कारखानों से प्रोपेन, ब्यूटेन और प्रोपाइलिन के उत्पादन में लगने वाले संसाधनों को एलपीजी उत्पादन में लगाकर रसोई गैस का उत्पादन को अधिकतम करें।
इससे देश में एलपीजी आपूर्ति के लिए क्षमता और घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ा है। इसका पूरा उत्पादन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए जा रहा है।
उन्होंने कहा मोदी सरकार ने हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति लागू की है - केवल बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि एलपीजी उत्पादन में भी। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता बढ़ने के साथ कुल बिजली उत्पादन में खनिज ईंधन आधारित बिजली का हिस्सा कम हुआ है।
वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार की एक निरंतर और नीतिगत दृष्टिकोण ने हमें इस स्थिति में पहुंचाया है कि हम अचानक आवश्यक सुधार कर सकें, ताकि किसी भी परिस्थिति में अतिरिक्त सहायता प्रदान की जा सके।"उन्होंने कहा कि एलपीजी संकट पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री बयान दे चुके हैं, इसलिए वह इस पर विस्तार से नहीं कहना चाहती हैं। हालांकि आश्वस्त किया कि भारत "इन अशांत परिस्थितियों में भी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है"।
उन्होंने कहा कि देश में कुल एलपीजी का लगभग 65 प्रतिशत आयात किया जाता है उसका का लगभग 90 प्रतिशत - होर्मुज़ क्षेत्र से आता है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत अब ऊर्जा के लिए आयातित माल की आपूर्ति बढ़ाने पर रही निर्भर नहीं है। आत्मनिर्भर भारत और बिजली क्षेत्र के माध्यम से ऊर्जा में आत्मनिर्भरता कई अलग-अलग तरीकों से मददगार साबित हो रही है। साल 2014 से अब तक देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है।
उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-खनिज ऊर्जा स्रोतों (कोलया-गैस आधारित क्षमता को छोड़कर) से बिजली उत्पादन की क्षमता का अनुपात 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है, और वह भी लक्षित 2030 तक की अवधि से बहुत पहले।
उन्होंने कहा कि आज देश में नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन ज्यादा किया जा रहा है। पिछले वर्षों में यह क्षमता दोगुनी हुई है। भारत सौर ऊर्जा के मामले में तीसरे और पवन ऊर्जा के मामले में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि देश में सौर ऊर्जा की प्रति यूनिट लागत पिछले एक दशक में करीब 90 प्रतिशत कम हुई है और दुनिया में सबसे कम है। स्टोरेज बैटरी की लागत भी काफी कम हुई है।
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