नयी दिल्ली , दिसम्बर 16 -- राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार करार देते हुए इसका विरोध करने वाली कांग्रेस पार्टी पर चुनाव आयोग की छवि बेवजह धूमिल करने का आरोप लगाया और कहा कि वह चुनावों में अपनी हार के कारणों पर अपने कार्यकर्ताओं और देशवासियों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार संसद में किसी भी मुद्दे पर चर्चा कराने से पीछे नहीं हटी है और वह कभी भी किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि एसआईआर पर चर्चा इसलिए नहीं कराई गई क्योंकि यह काम चुनाव आयोग का है और उसका कोई भी प्रतिनिधि संसद में नहीं है तो जवाब कौन देता।

श्री नड्डा ने चुनाव सुधारों पर सदन में करीब दस घंटे चली चर्चा में हिस्सा लेते हुए मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए चुनाव सुधार जरूरी हैं और चुनाव आयोग ने इस दिशा में निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ चुनाव सुधारों की लंबी यात्रा तय की है। चुनाव आयोग ने अपनी कार्य प्रणाली से दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई है।

नेता सदन ने कहा कि देश में एसआईआर का काम 1952 से चल रहा है और केवल एक बार 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को छोड़कर हमेशा कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में यह काम हुआ। उन्होंने कहा कि एक तरह से यह कहा जा सकता है कि यह काम एक ही पार्टी और एक ही परिवार ने देखा। उन्होंने कहा कि उस समय कभी भी एसआईआर पर सवाल नहीं उठाए गये। दशकों तक चुनाव आयोग के काम को एक पार्टी और यहां तक कि एक ही परिवार ने देखा और उस समय कोई सवाल नहीं उठा रहा था।

श्री नड्डा ने कहा कि एसआईआर पर देश में एक माहौल बनाने की कोशिश की गयी जैसे कि बहुत बड़ा घपला हो रहा है। जिम्मेदार विपक्षी पार्टी कांग्रेस की रैली में वोट चोरी और वोट चोर जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था के रूप में चुनाव आयोग को चुनाव की जिम्मेदारी दी गयी है। उसे मतदाता सूची बनाने और दुरूस्त करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा, " स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना उसकी जिम्मेदारी है। कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र सूची में शमिल न हो। मतदाता बनने की पहली योग्यता यह है कि वह भारत का नागिक हो और 18 वर्ष से उपर हो।" न्होंने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग का अधिकार है यह चलता रहेगा हम रहें या न रहें। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए और इनके बारे में इस्तेमाल किये जाने वाले शब्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के नतीजे उसके लिए तकलीफदेह हैं लेकिन उसे इसका मर्ज खोजना होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मर्ज कुछ और है और वह लोगों को गुमराह कर केवल कैडर को शांत करने के लिए कह रही है कि पार्टी चुनाव आयोग के कारण हार रही है।

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