राजकोट , दिसंबर 27 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शनिवार को राजकोट जिले के गोंडल तहसील के वोराकोटडा गांव के पास स्थित गिर गौ जतन संस्थान में 40 गांवों के किसानों के साथ संवाद किया।

श्री देवव्रत ने इस अवसर पर प्राकृतिक कृषि का महत्व समझाते हुए जहरमुक्त खेती अपनाने का आह्वान किया और 'जहरमुक्त भारत, गाय, गांव, कृषि यात्रा' गोंडल से सोमनाथ तक की पदयात्रा को भी प्रस्थान कराया। प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती छोड़ने से उत्पादन घट जाएगा, ऐसा भय किसानों में रहता है, लेकिन मेरे सहित अनेक किसानों के अनुभव बताते हैं कि प्राकृतिक कृषि से उत्पादन घटता नहीं, बल्कि गुणवत्ता बढ़ती है और उपज में भी वृद्धि होती है। इसके अलावा प्राकृतिक कृषि में लागत भी अत्यंत न्यूनतम होती है।

राज्यपाल ने आज सुबह लुनीवाव गांव में प्राकृतिक फार्म के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक पद्धति से की गई खेती में एक बीघा में 20 से 22 मन चने का उत्पादन होता है और उसमें पोषक तत्व भी भरपूर होते हैं। लुणीवाव में एक किसान केवल एक गाय से 16 बीघा भूमि में प्राकृतिक खेती कर रहा है। रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं के उपयोग से भूमि बंजर होकर पत्थर जैसी हो जाती है।

उन्होंने कहा कि जहरीली खाद से उगे अनाज के सेवन से शरीर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न होती हैं। यह जहर अब भूजल में भी प्रवेश कर चुका है और कई स्थानों पर पानी पीने योग्य नहीं रहा है। आईसीआर के एक शोध में यह सामने आया है कि गेहूं और चावल में 45 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट हो चुके हैं। ऐसे अनाज से पेट तो भरता है, लेकिन पोषण नहीं मिलता।

प्राकृतिक कृषि का महत्व समझाते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह सूक्ष्म जीवाणुओं पर आधारित खेती है। देशी गाय के 30 दिनों के गोबर से 30 एकड़ भूमि के लिए खाद तैयार की जा सकती है। देशी गाय के एक ग्राम गोबर में लगभग 300 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु होते हैं, जबकि दस किलो गोबर में 30 लाख करोड़ सूक्ष्म जीवाणु होते हैं। जब इसमें गुड़ और बेसन मिलाया जाता है, तो इन सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या असंख्य हो जाती है और खेत में इसका छिड़काव करने से भूमि की उर्वरता बढ़ जाती है।

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