राजकोट , दिसंबर 26 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को राजकोट में गाय दुहकर किसानों से संवाद किया।
श्री देवव्रत ने राजकोट जिले के दौरे के दौरान गोंडल तहसील के लुणीवाव गांव में सरकारी प्राथमिक विद्यालय के एक सामान्य कक्ष में रात्रि विश्राम करने के बाद कृषि, गाय और ग्रामीण संस्कृति का महत्व समझाते हुए वह तड़के गांव के प्राकृतिक खेती करने वाले किसान पंकजभाई मारकणा के खेत पहुंचे। जहां उन्होंने बैलगाड़ी चलायी। इसके बाद खेत में मक्का की कटायी करके गाय के लिए चारा तैयार किया।
तत्पश्चात उन्होंने गाय को चारा खिलाकर उसका दुग्ध दुहन किया और श्री पंकजभाई के खेत का भ्रमण कर प्राकृतिक पद्धति से उगाये गये चना, मटर आदि फसलों का निरीक्षण किया। इन फसलों में फूल और फलन अत्यंत अच्छे पाये गये तथा सभी फसलें कीट एवं रोग-मुक्त देखी गयीं।
किसान श्री पंकजभाई मारकणा की पुत्री के एन.सी.सी. में होने की जानकारी मिलने पर राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि शिक्षा भी आवश्यक है और कृषि कार्य भी उतना ही आवश्यक है। इस दौरान आसपास के किसान उनसे मिलने पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने सभी किसानों को प्राकृतिक खेती का महत्व समझाया। जीवामृत और घन जीवामृत बनाने की सरल एवं विस्तार से जानकारी देते हुए उसके असंख्य लाभ बतायें, जिससे किसान प्रेरित हुए।
उन्होंने किसानों से कहा कि प्राकृतिक खेती से भूमि इतनी उपजाऊ और सशक्त बन जाती है कि उसमें रोग नहीं आते। उन्होंने विशेष आग्रह करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक खेत को देखकर प्रेरणा लें और रासायनिक उर्वरकों का त्याग करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाइए और भूमि को सोने जैसी उपजाऊ बनाइए।
राज्यपाल की बातों से प्रभावित होकर किसानों ने प्राकृतिक कृषि की ओर अग्रसर होने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस प्रकार यह खेत किसानों के लिए प्राकृतिक कृषि की एक जीवंत पाठशाला बन गया। इसके पश्चात राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने कपास के एक खेत में चल रहे कार्य को देखा और खेत का निरीक्षण कर किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कपास की चुनाई की तथा संवाद के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
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