गांधीनगर , जनवरी 16 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, नगरपालिका आयुक्तों तथा जिला विकास अधिकारियों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए प्राकृतिक कृषि, वृक्षारोपण, ऊर्जा संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।श्री देवव्रत ने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और उपजाऊ भूमि को सुरक्षित रखना भी है। प्राकृतिक खेती अब एक राष्ट्रीय मिशन बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गुजरात इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक तहसील में कम से कम एक प्राकृतिक कृषि विक्रय केंद्र अवश्य होना चाहिए। इसके अतिरिक्त बड़े शहरों में ऐसे चार से पांच केंद्र स्थापित किये जाने चाहिए, ताकि नागरिकों को विषमुक्त प्राकृतिक उत्पाद सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।
ग्राम कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत संबंधित गांव में कम से कम एक एकड़ भूमि पर सघन वृक्षारोपण कर 'मिनी जंगल' विकसित करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि रोपे गये वृक्षों की जिम्मेदारी गांव के ही अलग-अलग परिवारों को सौंपी जाये, जिससे वृक्षों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित हो और उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
लोकभवन तथा अन्य विभागों के प्रयासों से गत अप्रैल माह से अब तक लगभग 16 करोड़ रुपये की बिजली की बचत हुई है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्ट्रीट लाइटों में 'सेंसर' के स्थान पर 'टाइमर' लगाने का सुझाव दिया, जिससे प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे की बिजली की बचत संभव हो सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि हम ईमानदारी से यह कार्य नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियां हमें क्षमा नहीं करेंगी। धरती माता, गौ माता और पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस बैठक में राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव जयन्ती रवि, लोकभवन के सचिव अशोक शर्मा, गुजरात ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक जय प्रकाश और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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