जूनागढ़ , जनवरी 21 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बुधवार को जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को राष्ट्र और समाज के उत्थान में योगदान देने के साथ-साथ लोगों के जीवन, स्वास्थ्य तथा प्रकृति-पर्यावरण के संरक्षण के लिए आवश्यक प्राकृतिक कृषि के मिशन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के सरदार सभागृह में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में कृषि क्षेत्र की विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं को 74 गोल्ड मेडल, गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल तथा एक नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इस दीक्षांत समारोह में कुल 578 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।

अध्यक्षीय संबोधन में श्री देवव्रत ने कहा कि आगामी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए प्राकृतिक कृषि अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक कृषि से लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रकृति, जल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है तथा भूमि की उर्वरता में भी भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ेगा तो कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। डॉ. स्वामीनाथन की प्रेरणा से हरित क्रांति के समय देश की भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन 2.5 प्रतिशत था, जो रासायनिक कृषि के प्रभाव के कारण घटकर 0.5 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि रासायनिक कृषि से भूमि का ऑर्गेनिक कार्बन घटता है और भूमि के पोषक तत्वों के रूप में कार्य करने वाले सूक्ष्म जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक कृषि के कारण लगभग 10 प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है और आगे भी उत्पादन में गिरावट की आशंका है।उन्होंने कहा कि तय मात्रा से अधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से भूमि बंजर होती जा रही है। रासायनिक कृषि पद्धति से उत्पादित खाद्य पदार्थों के सेवन से कैंसर, डायबिटीज, हाईपर टेंशन, किडनी जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं। इस प्रकार रासायनिक कृषि से रोग बढ़ते हैं, जबकि प्राकृतिक कृषि स्वास्थ्य प्रदान करती है। उन्होंने एक अन्य शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान में यह भी सामने आया है कि रासायनिक कृषि से उत्पादित गेहूं और चावल में पोषक तत्वों की कमी पाई गई है।

राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने कहा कि रासायनिक कृषि से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती है। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से नाइट्रस ऑक्साइड जैसी विषैली गैसें वातावरण में मिलती हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 312 गुना अधिक खतरनाक होती हैं।

डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्षों के परिश्रम के बाद यह लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने समाज और राष्ट्र के उत्कर्ष के लिए कार्य करने तथा जनहितकारी प्राकृतिक कृषि मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने और उसके प्रचार-प्रसार का सभी से आह्वान किया।

उन्होंने जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय सहित राज्य के चारों कृषि विश्वविद्यालयों को प्राकृतिक कृषि के संदर्भ में किए जा रहे अनुसंधानों के लिए विशेष शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन विश्वविद्यालयों के शोध से यह सिद्ध हुआ है कि प्राकृतिक कृषि से खेत उत्पादन में कमी नहीं आती। उन्होंने भारतीय मूल के बीजों को और अधिक उन्नत बनाने, प्राकृतिक कृषि में नये अनुसंधान करने और इस अभियान को तेज गति से आगे बढ़ाने का भी अनुरोध किया। गुजरात सरकार के सतत प्रयासों से राज्य में प्राकृतिक कृषि का मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है और लगभग आठ लाख किसान इसे अपना चुके हैं। संबोधन के दौरान उन्होंने राज्यभर में किए गए अपने ग्रामीण दौरों के अनुभव भी साझा किए।

राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के प्राकृतिक कृषि संबंधी प्रेरणादायी संदेश का भी उल्लेख किया तथा वीडियो के माध्यम से प्राकृतिक कृषि के सकारात्मक परिणामों की जानकारी दी।

हरियाणा के करनाल स्थित महाराणा प्रताप हॉर्टीकल्चर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एस. के. मल्होत्रा ने इस अवसर पर कहा कि यह समारोह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शैक्षणिक प्रतिबद्धता, अनुसंधान और सेवाओं के दो दशकों की उपलब्धियों का उत्सव है, जो विश्वविद्यालय की विकास यात्रा को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की आत्मनिर्भर भारत और 2047 तक विकसित भारत की दीर्घकालीन दृष्टि में कृषि को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखा गया है। फलों और सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर भी उन्होंने जोर दिया। गुजरात की सुजलाम-सुफलाम योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ड्रिप इरिगेशन के क्षेत्र में गुजरात देशभर में एक मॉडल राज्य बनकर उभरा है।

इस दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के करकमलों से कृषि, बागवानी, कृषि इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी तथा एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट संकाय के स्नातक और परास्नातक स्तर के कुल 578 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही उच्च शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 74 गोल्ड मेडल- गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल तथा एक नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।

श्री आचार्य देवव्रत ने आधुनिक, आकर्षक और मोबाइल-फ्रेंडली डिज़ाइन वाली जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय की नई वेबसाइट का लोकार्पण किया। विद्यार्थियों को एसएसआईपी ग्रांट के स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए तथा विश्वविद्यालय के विजन और मिशन को दर्शाने वाली वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। कुलपति डॉ. वी. पी. चोवटिया ने स्वागत संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्रार श्री वाई. एच. घेलाणी ने आभार व्यक्त किया।

दीक्षांत समारोह के पश्चात राज्यपाल ने प्राकृतिक कृषि पद्धति से उत्पादित सब्जियों और अनाज के प्रदर्शन हेतु लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया।

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