गांधीनगर , दिसंबर 17 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने लोकभवन में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य में चल रहे टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रगति की शनिवार को विस्तृत समीक्षा की।

श्री देवव्रत ने बैठक के दौरान कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई को जनआंदोलन बनाना अत्यंत आवश्यक है। समाज के प्रत्येक वर्ग की जागरूक और सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सफलता की मुख्य आधारशिला है। हर टीबी रोगी तक समय पर उचित उपचार और पर्याप्त पोषण पहुंचे, इसके लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं, ताकि गुजरात शीघ्र ही टीबी मुक्त राज्य बनकर देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत कर सके।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 1,49,856 टीबी रोगी दर्ज किए गए थे, जिनमें से 1,24,992 रोगी पूरी तरह स्वस्थ हुए और 6,606 मृत्यु दर्ज हुईं। वर्ष 2023 में 1,42,294 रोगी दर्ज हुए, जिनमें से 1,32,809 स्वस्थ हुए और मृत्यु संख्या 5,874 रही। वर्ष 2024 में 1,37,896 रोगियों का पंजीकरण हुआ, 1,24,938 रोगी स्वस्थ हुए और 5,638 मौतें दर्ज की गयीं। वर्ष 2025 में (जनवरी से अक्टूबर) 1,12,981 नये रोगी दर्ज हुए हैं, जो वर्तमान में उपचाराधीन हैं, जबकि इस अवधि में मृत्यु संख्या 3,516 रही है, जो 2024 की समान अवधि की तुलना में स्पष्ट कमी दर्शाती है।

टीबी से होने वाली मौतों में और कमी लाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों के टीबी विशेषज्ञों और राज्य टीबी टीम के सहयोग से एक व्यापक टीबी उपचार एवं फॉलो-अप प्रोटोकॉल तैयार किया है। इस प्रोटोकॉल के तहत रोगियों को निदान के समय लो-रिस्क और हाई-रिस्क श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।

हाई-रिस्क रोगियों के लिए जिला और मेडिकल कॉलेज स्तर पर अतिरिक्त जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। दवा शुरू करने के 15वें दिन तथा उसके बाद हर दो महीने में मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है। छह महीने पूरे होने के बाद टीआरयूईएनएटी द्वारा स्प्यूटम जांच और एक्स-रे आधारित मूल्यांकन को अनिवार्य रखा गया है। प्रत्येक माह के चौथे सोमवार को राज्य स्तर पर टीबी डेथ ऑडिट समीक्षा बैठक आयोजित की जाती है।

राज्य में टीबी निदान के लिए 2,351 निःशुल्क माइक्रोस्कोपी केंद्र, अहमदाबाद, जामनगर और सूरत में तीन टीबी कल्चर लैब, 74 सीबीएनएएटी मशीनें और 326 टीआरयूईएनएटी मशीनें कार्यरत हैं। इसके अलावा 60 नई टीआरयूईएनएटी मशीनों की खरीद प्रक्रिया प्रगति पर है। स्क्रीनिंग के लिए 37 अल्ट्रा पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं और अतिरिक्त 105 मशीनें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है।

राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी का उपचार पूरी तरह निःशुल्क है। निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत प्रत्येक टीबी रोगी को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से दी जाती है। वर्ष 2023 में 36.20 करोड़, वर्ष 2024 में 49.70 करोड़ और वर्ष 2025 में (जनवरी-अक्टूबर) 46.30 करोड़ रुपये की डीबीटी सहायता रोगियों के खातों में जमा करायी गयी हैं।

टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एनजीओ, सी.एस.आर. और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से निक्षय मित्र मॉडल लागू किया गया है। राज्य में 29,734 निक्षय मित्र पंजीकृत हैं, जिनके माध्यम से टीबी रोगियों को पोषण किट वितरित की गयी हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2023 में 1,610 और वर्ष 2024 में 3,128 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत घोषित किया गया है।

टीबी रोगियों की समय पर निगरानी के लिए स्वास्थ्य समीक्षा केंद्र द्वारा टेली-कॉलिंग प्रणाली लागू की गई है। वर्ष 2025 में 1,19,259 कॉल के माध्यम से रोगियों से संपर्क किया गया और 9,523 जरूरतमंद रोगियों को जिला स्तर पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करायी गयी हैं।

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