कुरुक्षेत्र , फरवरी 03 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में हरियाणा स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ भूमि पर किये जा रहे प्राकृतिक कृषि के सफल प्रयोगों का अवलोकन करने के लिए गुजरात के कृषि, किसान कल्याण एवं पशुपालन मंत्री जीतुभाई वाघाणी, राज्यमंत्री रमेश कटारा, कृषि विभाग के अग्रसचिव आर.सी. मीणा सहित प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचा।

इस प्रतिनिधिमंडल ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक कृषि फार्म के साथ-साथ गौशाला, बायोगैस प्लांट, जीवामृत एवं नीमास्त्र प्लांट, ऋषि-आधारित अर्श विद्यालय तथा नेचुरोपैथी सेंटर सहित विभिन्न केंद्रों का भ्रमण किया और प्राकृतिक कृषि के वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।श्री देवव्रत ने इस अवसर पर कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्राकृतिक कृषि मिशन से देशभर में बड़ी संख्या में किसान जुड़ रहे हैं। गुजरात राज्य में लगभग नौ लाख किसान प्राकृतिक कृषि कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक कृषि फार्म पर पिछले 10 वर्षों से देशी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप यहां की भूमि अब 'ऑर्गेनिक कार्बन रिच' श्रेणी में आ गयी है। यह भूमि इतनी उपजाऊ हो चुकी है कि यहां गेहूं, चावल एवं अन्य फसलों का उत्पादन रासायनिक खेती की तुलना में भी ज्यादा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि पर्यावरण और धरती को बचाने का भी एकमात्र मार्ग है और देश के किसानों ने इस सत्य को समझते हुए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक कृषि अपनानी शुरू कर दी है।

श्री वाघाणी ने इस दौरान कहा कि गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म पर राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में हो रही प्राकृतिक खेती किसी चमत्कार से कम नहीं है। हरियाणा की भूमि में जहां सामान्यतः ड्रैगन फ्रूट, खजूर, सेब और चने की खेती नहीं होती, वहीं गुरुकुल के फार्म पर प्राकृतिक कृषि के माध्यम से यह फसलें बहुत अच्छी तरह उगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रयासों से आज देशभर में लाखों किसान विषमुक्त प्राकृतिक कृषि अपना रहे हैं और देश को स्वस्थ एवं समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

कृषि मंत्री ने फार्म पर उगायी गयी पत्तागोभी, मटर और गाजर जैसी फसलों का निरीक्षण किया तथा ताजा मटर और पत्तागोभी तोड़कर उनके शुद्ध प्राकृतिक स्वाद का आनंद लिया। उन्होंने गुरुकुल में लगभग 15 फुट ऊंची गन्ने की फसल देखकर इसकी विशेष प्रशंसा की। साथ ही हरी-भरी सब्जियां तथा गेहूं-चने की सहफसल पद्धति के मॉडल भी देखे और गुरुकुल के फार्म में तैयार हो रहे गरमा-गरम प्राकृतिक गुड़ का स्वाद भी लिया।

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