सहारनपुर , मई 11 -- उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के देवबंद कोतवाली क्षेत्र स्थित दलित बहुल गांव लालवाला में दो बीघा भूमि के स्वामित्व को लेकर हुए विवाद और जातीय तनाव के बाद सोमवार को जिलाधिकारी अरविंद चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह ने गांव का दौरा कर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

करीब दो हजार की आबादी वाले लालवाला गांव में नौ मई की सुबह भूमि विवाद को लेकर दो पक्षों में संघर्ष और पथराव की घटना हुई थी, जिसके बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई थी। प्रशासन के अनुसार वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में और शांतिपूर्ण है, लेकिन एहतियात के तौर पर गांव में पीएसी तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अभिनंदन सिंह ने बताया कि मामले की जांच एसडीएम देवबंद युवराज सिंह कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही पथराव और उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

उन्होंने बताया कि कुछ लोगों द्वारा विवादित भूमि पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित किए जाने की अफवाह फैलाई गई थी, जबकि वास्तविकता यह है कि गांव की आबादी से जुड़ी दो बीघा जमीन पर पिछले कुछ वर्षों से राजपूत समुदाय के रविंद्र राणा का कब्जा बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार वर्ष 2008-09 में राजपूत पक्ष ने दलित समुदाय के नरेश कुमार पुत्र स्वर्गीय राम सिंह से कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन विवादित भूमि का कोई वैध बैनामा नहीं है। दोनों पक्षों के बीच भूमि स्वामित्व का मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार तहसील दिवस के दौरान राजपूत पक्ष ने आशंका जताई थी कि दलित समुदाय विवादित भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर सकता है, जिसके बाद गांव में पीएसी पिकेट तैनात की गई थी। इसके बावजूद विवाद हिंसक रूप ले बैठा।

भीम आर्मी प्रमुख एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी इस मामले को लेकर जिलाधिकारी और एसएसपी से बातचीत की। प्रशासन ने उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। चंद्रशेखर ने रविवार को लालवाला गांव जाने की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी और उन्हें छुटमलपुर स्थित आवास पर ही रोक दिया गया था। हालांकि उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना।

इधर, बसपा प्रमुख मायावती ने भी सोमवार को सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

गौरतलब है कि लालवाला गांव में लगभग 97 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय की है, जबकि राजपूत समुदाय के केवल नौ परिवार निवास करते हैं। गांव के आसपास के क्षेत्रों में राजपूत समुदाय की संख्या अधिक है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप जयंती जुलूस को लेकर राजपूत और दलित समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसने प्रदेश की राजनीति में व्यापक असर डाला था। उसी घटना के बाद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ा और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नगीना सुरक्षित सीट से जीत दर्ज कर लोकसभा पहुंचने में सफलता हासिल की थी।

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