अमरोहा , मार्च 03 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के गजरौला-नाईपुरा क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट से भूजल प्रदूषण के विरोध में किसानों ने शासन-प्रशासन और जिम्मेदार इकाइयों का पुतला दहन किया। धरना 73वें दिन में प्रवेश कर गया है और किसानों ने होली के बहिष्कार की घोषणा की है। शहबाजपुर डोर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चल रहे अनिश्चितकालीन धरने में मंगलवार को सैकड़ों महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रालियों से पहुंचीं और जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित कर स्वास्थ्य आपातकाल लागू नहीं किया जाता और दूषित जल संकट का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक होली और रंग एकादशी सहित कोई भी त्योहार नहीं मनाया जाएगा।
किसानों का आरोप है कि रासायनिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला अपशिष्ट भूजल को 'साइलेंट किलर' बना चुका है। दूषित पानी के कारण ग्रामीणों में असाध्य बीमारियां बढ़ रही हैं, फसलें प्रभावित हो रही हैं और दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक आपदा का रूप ले चुका है।
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि एक ओर सरकार कैमिकल युक्त रंगों से होली न खेलने की अपील करती है, वहीं दूसरी ओर रासायनिक कारखानों से पूरे इलाके का पानी जहरीला हो रहा है। उन्होंने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया।
किसान नेताओं ने मांग की कि दोषी कारखानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, दूषित जल स्रोतों की सफाई और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, धरना जारी रहेगा।
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