पटना , फरवरी 19 -- िहार की दुर्लभ कलाओं को लुप्त होने से बचाने और पुर्नजीवित करने के उद्देश्य से बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से मुख्यमंत्री गुरु शिष्य परंपरा योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य अनुभवी गुरुओं के मार्गदर्यान में युवा पीढ़ी (शिष्यों) को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत लोकनृत्य, लोकसंगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय गायन, चित्रकला और पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित किया जा रहा है।

इस योजना में गौरैयाबाबा, भराथरी बाबा, सती बिहलुा, हिरनी-वीरनी आदि लोकगाथाओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही बिरहा, चकुली, कीर्तनियां आदि जैसे लोकनाट्य, पाईका, झिझिया, कठघोड़वा आदि जैसे लोकनृत्य, चैता , सुमंगली, संस्कार गीत आदि जैसे लोकसंगीत, वाद्य यंत्र जैसे सारंगी, ईसराज, नगाड़ा आदि, ध्रुपद, ठुमरी, पखावज, सितार, दादरा आदि जैसे शास्त्रीय कला और पटना कलम, टेराकोटा, भोजपुरी छापा कला आदि जैसे चित्रकला जैसी कलाओं को शामिल किया गया है।

इस योजना में दो वर्षों का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर गुरु और शिष्य की प्रस्तुति के साथ सम्मान समारोह (दीक्षांत समारोह) मनाया जाता है। इस योजना के तहत वित्तीय सहायता (मानदेय) का भी प्रावधान है। जिसमें गुरुओं को 15,000 रुपये प्रति माह और संगतकार (सहयोगी कलाकार) को 7500 रुपये प्रति माह देने का प्रावधान है। इसके साथ ही शिष्य (प्रशिक्षु युवा) को 3000 रुपये प्रति माह देने का प्रावधान है। लेकिन इसके साथ ही इसमें शर्त है कि शिष्यों को हर महीने कम से कम 12 दिन की उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

योजना में पात्रता के तौर पर गुरुओं को 50 वर्ष या उससे अधिक की आयु होना अनिवार्य है। उनका बिहार का मूल निवासी होना आवश्यक है। इसके अलावे संबंधित कला में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए और प्रशिक्षण देने के लिए घर या स्थान पर उचित व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं शिष्य के लिए भी बिहार का निवासी होना, कला सीखने की इच्छा और योग्यता होना, और चयन प्रक्रिया गुरु और जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी की देखरेख में होना आवश्यक है। इसमें गुरुओं का चयन कला एवं संस्कृति विभाग की विशेषज्ञ समिति की ओर से किया जाएगा। शिष्य का चयन संबंधित जिले के गुरु व जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी करेंगे।

इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए कला एवं संस्कृति विभाग के आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या अपने जिले के कला एवं संस्कृति पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

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