दुर्ग , फरवरी 06 -- छत्तीसगढ में दुर्ग जिले के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में प्रदेश के विकास और युवाओं के रोजगार को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। दुर्ग स्थित लोक निर्माण विभाग सभागार में आयोजित दो अहम बैठकों में प्रदेश के गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया गया, वहीं देश की नामी आईटी कंपनियों के छत्तीसगढ़ आगमन का रास्ता भी साफ हो गया।
इन बैठकों में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विभिन्न विभागों के मंत्री, सांसद, विधायक तथा प्रदेश भर के सभी कलेक्टर मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की पहली बैठक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े कुल 2226 प्रस्तावित कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राधिकरण के बजट की जानकारी प्रस्तुत की गई तथा स्वीकृत कार्यों का अनुमोदन किया गया। इसके साथ ही पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक के दौरान मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं कलेक्टरों ने गांवों के सर्वांगीण विकास को लेकर अपने-अपने सुझाव रखे।
राज्य सरकार के सहयोग से आईआईटी भिलाई द्वारा देश की 40 प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए। इन कंपनियों ने प्रस्तावित आईटी पार्क में अपने सेंटर स्थापित करने पर सहमति जताई है।
इस समझौते के बाद प्रदेश में आईटी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति को नई गति मिलेगी।
बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के लिए 80 करोड़ रुपये का बजट आरक्षित किया गया है, जिसे विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
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