रायपुर , अप्रैल 28 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए पहचाना जाता था, अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। "मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान" के तहत वनांचल के दूरस्थ और कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में भी डॉक्टर और आवश्यक दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। यह अभियान अब क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है।

अभियान की विशेषता इसकी व्यापक पहुंच है, जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य कर्मी स्वयं दुर्गम गांवों तक पहुंचकर घर-घर स्वास्थ्य जांच और उपचार कर रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी संक्रामक बीमारियों की मौके पर जांच के साथ ही बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसी जीवनशैली एवं गंभीर बीमारियों की पहचान कर उपचार की दिशा में पहल की जा रही है।

हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुंचाने की घटना इस अभियान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम होते हुए 310 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दूरी तय कर सुकमा जिला अस्पताल पहुंचाया। यह प्रयास समय पर निर्णय, प्रभावी परामर्श और सतत फॉलो-अप का परिणाम रहा, जिससे एक जीवन को बचाया जा सका।

आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अब ग्रामीणों को इलाज के लिए आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ रहा है। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा क्षेत्र के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, जिससे उपचार में विलंब न हो।

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