चेन्नई , दिसंबर 11 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भगवान मुरुगन के छह स्थानों में से एक तिरुपरंकुंद्रन पहाड़ियों पर दीपम जलाने के मुद्दे पर कहा कि आरएसएस इस मामले को बढ़ावा नहीं देगा क्योंकि यह मामला अदालत के विचाराधीन है।

श्री भागवत ने बुधवार को तिरुची में 'संघ की यात्रा के 100 वर्ष' कार्यक्रम में कहा कि फिलहाल मामला अदालत के विचाराधीन है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एच. राजा द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की जरूरत है, उन्होंने कहा, "अगर इसे बढ़ाने की जरूरत है, तो यह किया जाएगा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसकी जरूरत है।"उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें दीपम को खंभे पर जलाने का निर्देश दिया गया था। परंपरागत रूप से हालांकि दीपम को पिल्लैयारमंदिर के ऊपर (उची पिल्लैयार मंदिर) जलाया जाता रहा है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा, "तमिलनाडु में हिंदुओं का जागरण, मुझे लगता है, वांछित परिणाम लाने के लिए पर्याप्त है। लेकिन अगर वास्तव में इसकी आवश्यकता है, तो हिंदू संगठन तमिलनाडु में भी काम कर रहे हैं, वे हमें बताएंगे, और हम इसके बारे में सोचेंगे। हमें इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता नहीं होगी।"उल्लेखनीय है कि जब मदुरै पीठ के न्यायाधीश जी. आर. स्वामीनाथन ने एक दिसंबर को एक हिंदू कार्यकर्ता की याचिका पर आदेश दिया कि कार्तिगई दीपम को तीन दिसंबर को दरगाह के पास के ब्रिटिशकालीन पत्थर के खंभे पर जलाया जाए, तो विवाद उठ खड़ा हुआ।

मंदिर प्रशासन ने लेकिन इसे उची पिल्लैयार मंदिर में जलाया, जो भगवान मुरुगन मंदिर के गर्भगृह के ठीक ऊपर है। यह देखते हुए कि खंभे पर दीपम जलाने के आदेश से विवाद बढ़ सकता है, जिला प्रशासन ने धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगा दिया था।

जब याचिकाकर्ता ने इस आदेश के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की, तो न्यायमूर्ति ने आदेश को रद्द किया और अगले ही दिन दरगाह के पास पत्थर के खंभे पर अर्धसैनिक बलों के सुरक्षा के तहत दीपम जलाने का निर्देश दिया। लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका का हवाला देते हुए सैकड़ों भाजपा और हिंदू संगठन के नेताओं को अनुमति नहीं दी।

इस बीच, विपक्षी इंडिया समूह के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को याचिका भेजी और न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग नोटिस सौंपा।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति स्वामीनाथन का आदेश एक खंडपीठ के निर्णय के विपरीत है, जिसने दरगाह के पास खंभे पर दीपम जलाने की याचिका को खारिज किया था।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 1996 में स्पष्ट किया था कि केवल मंदिर प्रशासन ही दीपम जला सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि भविष्य में किसी भी नए स्थान के लिए हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ निधि (एचार एंड सीई) विभाग की मंजूरी लेनी होगी और यह स्थान 75 मीटर के भीतर होना चाहिए, जैसा कि 1920 के अदालत आदेश में आरक्षित था।

इंडिया समूह के नेताओं के साथ, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को महाभियोग नोटिस सौंपा, जिसमें न्यायाधीश स्वामीनाथन को हटाने की मांग की गई है।

महाभियोग प्रस्ताव में न्यायाधीश स्वामीनाथन पर 'न्यायिक अतिक्रमण' और 'दुराचार के बराबर कार्य' के अलावा दीपम जलाने के आदेश में वैचारिक पक्षपात का आरोप लगाया गया है।

इंडिया समूह के प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी(माकपा) के एस. वींकटेशन, द्रमुक सांसद ए. राजा एवं अन्य सांसद शामिल थे।

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