हैदराबाद , दिसंबर 28 -- विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों का राष्ट्रीय मंच (एनपीआरडी) की तेलंगाना राज्य समिति ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू करते हुए आरोप लगाया कि यह दिव्यांगों के आजीविका अधिकारों को खतरे में डालेगा।

मंच ने राजधानी में आरटीसी एक्स रोड्स पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए कानून की प्रतियां जलाई। मंच के प्रदेश अध्यक्ष के वेंकट और महासचिव एम आदिवाइया ने कहा कि प्रस्तावित कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेते हुए ग्रामीण दिव्यांगों के लिए रोजगार की गारंटी को कमजोर करता है और उन्हें और गहरी गरीबी की ओर धकेलता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि फंडिंग पैटर्न और कार्यान्वयन में बदलाव से काम तक पहुंच कम हो जाएगी, भले ही 125 दिनों के रोजगार देने का दावा किया जा रहा हो। उन्होंने इस कानून को दिव्यांगों के अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना के विपरीत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने घोषणा की कि 30 और 31 दिसंबर को राज्यभर के जिला केंद्रों पर इसी तरह के विरोध-प्रदर्शन होंगे, जिसमें विधेयक की प्रतियां जलाना भी शामिल है।

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