कोलकाता , दिसंबर 30 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले किसने किए है।
सुश्री बनर्जी ने बांकुरा के बोरझोरा में जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए ज़मीन नहीं दिए जाने संबंधी श्री शाह के दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि रेलवे, ईसीएल, अंडाल में हवाईअड्डा और पानागढ़, पेट्रापोल और तारकेश्वर में दूसरे काम जैसे अलग-अलग केन्द्रीय परियोजना कैसी हुयी। उन्होंने कहा , "आप (अमित शाह) पहले आपको दी गई ज़मीनों का इस्तेमाल करें और फिर मांगें। हम केन्द्रीय बल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र रुप से काम करना चाहिए।" उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार और डर फैलाने के आरोपों पर भी भाजपा की आलोचना की।
उन्होंने भाजपा को ''भ्र्ष्टाचारी भाजपा पार्टी," करार देते हुए उस पर एसआईआर के तहत लोगों को परेशान करने और सिर्फ अपने फायदे पक्का करने का आरोप लगाया।
सुश्री बनर्जी ने श्री शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना महाभारत के पौराणिक किरदारों दुशासन और दुर्योधन से की। उन्होंने कहा, "जब भी चुनाव आते हैं, दुर्योधन और दुशासन दोनों शकुनि और उसके चेलों के साथ बंगाल आते हैं और आरोप लगाते हैं कि मैंने ज़मीन नहीं दी।"सुश्री बनर्जी ने सवाल किया कि क्या पहलगाम हमला "केन्द्र ने किया था" जब केंद्रीय गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव वाले राज्य में आतंकवादी नेटवर्क काम कर रहे थे। उन्होंने श्री शाह के इस दावे पर कि पश्चिम बंगाल आतंकवादी हब बन गया है, पलटवार करते हुए कहा, "अगर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नहीं हैं, तो पहलगाम कैसे हुआ। क्या आपने पहलगाम में हमला किया। दिल्ली में हुई घटना के पीछे कौन था।"उन्होंने कहा कि क्या पहलगाम हमला केंद्र ने किया था, उन्होंने 22 अप्रैल को पाकिस्तान के लश्कर आतंकवादियों द्वारा 26 पर्यटकों के मारे जाने की घटना का ज़िक्र किया।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा, और आरोप लगाया कि राज्य भर में 90 से 80 साल के लोगों को भी परेशान किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत चुनाव आयोग के अधिकारियों ने एसआईआर के तहत 1.5 करोड़ नामों को हटाने की योजना बनाई है, जिसमें राजबंशी, मतुआ और आदिवासी जैसे हाशिए पर पड़े समुदायों को निशाना बनाया गया।
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