अमृतसर , फरवरी 12 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने दिल्ली सराकर द्वारा सिख कैदी प्रो. देवेंद्रपाल सिंह भुल्लर की रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और अन्य मंत्रियों ने उनसे श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में मुलाकात की थी, जिस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रो. भुल्लर की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि इससे पहले, दस साल तक दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रो. भुल्लर की रिहाई के मामले को लंबित रखा था और सिख भावनाओं का सम्मान करने में विफल रही थी।
उन्होंने कहा कि अब दिल्ली में सरकार बदलने और भाजपा के सत्ता में आने के बाद, सरकार के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने कुल 51 कैदियों की रिहाई के मामलों पर विचार किया, जिनमें से 24 मामले खारिज कर दिए गए जबकि 27 को मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार दूसरे कैदियों को रिहा करने का फैसला कर सकती है, तो अगर वह चाहे तो प्रो. भुल्लर को भी रिहा कर सकती है।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि प्रो. भुल्लर के मामले को इंसानियत और दया के नजरिए से देखते हुए, सरकार को पूरे सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें हमेशा के लिए रिहा कर देना चाहिए, क्योंकि वह अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी अब पूरी तरह से दिल्ली सरकार की है, और देश के लिए सिखों के योगदान को देखते हुए, सरकार को प्रो. भुल्लर की फाइल पर साइन करके उनकी रिहाई पक्की करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर आज देश को आजादी का फल मिल रहा है, तो इसमें सिखों का सबसे बड़ा योगदान है, और जब भी कोई मुश्किल आती है, सिख हमेशा सेवा में सबसे आगे रहते हैं। सरकार को सिखों से जुड़े ऐसे हर मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होने पूरे सिख समुदाय से अपील की कि वे बंदी सिंहों की रिहाई के लिए शांति से अपनी आवाज़ उठाते रहें और यह पक्का करें कि पूरा खालसा पंथ एकजुट रहे और इस मुद्दे पर मिलकर काम करे।
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