नयी दिल्ली , 29 मार्च (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भइया जी जोशी ने समाज और राष्ट्र निर्माण में मातृत्व की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि एक माँ सिर्फ़ बच्चों को पालती ही नहीं बनाती, बल्कि परंपराओं में बाँधकर एक संस्कारित समाज और राष्ट्र का निर्माण करती है।

श्री भइया जी जोशी ने रविवार को यहां के नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय मातृ संस्कार समागम में महिलाओं से राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आने आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मातृत्व जीवन का किसी समाज के सृजन में कितना महत्व है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अभिमन्यु जैसा बालक माता के संस्कारों की वजह से गर्भ में ही युद्ध कला सीखता है। छत्रपति शिवाजी महाराज स्वराज का सपना गर्भ में देखते हैं और उसे धरातल पर साकार करते हैं। कृष्ण देवकी के गर्भ से राक्षसी विनाश के लिए दैव्यशक्ति लेकर आते।

उन्होंने कहा कि माता और बच्चे का सिर्फ खून नहीं, बल्कि सांसों का रिश्ता है। गर्भ से बच्चे की सांस और संस्कार दोनों ही माँ से बंधे होते हैं। इसलिए एक संस्कारित माँ, सिर्फ़ एक सुसंस्कारित बच्चे को ही नहीं, बल्कि परंपराओं में बंधे एक संस्कारित समाज और राष्ट्र का भी निर्माण करती है।

उन्होंने कहा, " आज जहाँ विमर्श का युद्ध चल रहा है और पाश्चात्य सभ्यता हम पर हावी हो रही है। ऐसी परिस्थिति में माँ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।" उन्होंने कहा, "हम वासुदेव: कुटुंबकम् की बात करते है और सर्वे भवन्तु सुखिन का भाव रखते हैं। ये हमारे संस्कारों का हिस्सा है, मगर अधर्म के विनाश के लिए धर्म की युद्ध भी हमारे ही संस्कारों का हिस्सा है, जिसमें मातृ शक्ति और मातृत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। आज हम सभी को मातृत्व जागरण के लिए प्राण लेने की जरूरत है और ये काम कोई एक -दो दिन या साल दो साल का नहीं है। इस काम को तन-मन से पूरे जीवन करते रहने की जरूरत है।"विश्व मांगल्य सभा की तरफ़ से आयोजित इस अधिवेशन का थीम मातृ संस्कार समागम , परंपरा -प्रगति-परिपक्वता का संगम था। इस अधिवेशन के प्रथम सत्र में जहाँ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दिल्ली प्रांत के प्रचारक विशाल जी शामिल हुए। वहीं समापन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भइया जी जोशी थे।

अधिवेशन के पहले दिन उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी शामिल हुईं। कार्यक्रम में विश्व मांगल्य सभा के मार्गदर्शक और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक प्रशांत दामोदर हलतारकर और सह संगठन मंत्री पूजा माधव देशमुख सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस दो दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन उद्धाघटन सत्र के मातृ संस्कार समागम के उद्घाटन सत्र में आज के परिदृश्य में युगानुकूल मातृत्व की जरूरत और चुनौतियों पर चर्चा हुई।

श्रीमती धामी ने कहा कि भारत के परिवार की इकाई राष्ट्र निर्माण की धुरी है । जब दस अच्छे परिवार मिलते है तो एक स्वस्थ समाज बनता है और स्वास्थ्य समाज एक मज़बूत राष्ट्र का निर्माण करता है ।

अधिवेशन के दूसरे सत्र में विश्व मांगल्य सभा की सह संगठन मंत्री पूजा जी देशमुख ने मातृ संगठन की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि समाज की बुराइयों को खत्म करने के लिए हर युग में मातृ संगठन की जरूरत पड़ी है। देव लोक में भी राक्षसी प्रवृति को खत्म करने के लिए इंद्र पत्नी इंद्राणी ने भी मातृ संगठन का निर्माण किया था। रानी लक्ष्मी बाई ने भी अपने महिला संगठन आर्मी के दम पर अंग्रेज़ों के दाँत खट्टे किये थे। समाज की कुरीतियों के ख़ात्मे और बड़े बदलाव के लिए हर युग में मातृ संगठन की ज़रूरत पड़ी है । विश्व मांगल्य सभा ने भी एक ऐसा ही बेड़ा उठाया है परिवार निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करते हुए एक अच्छी मातृ निर्माण का बेड़ा उठाया है । माँ एक परिवार की धुरी होती है जो ना सिर्फ पूरे परिवार को बांध कर रखती है बल्कि संस्कारों के धारा प्रवाह की प्रथम इकाई भी होती है ।

विश्व मांगल्य सभा के मार्गदर्शक प्रशांत हलतारकर ने कहा कि सभी समुदाय में युग बदल जाता है, मगर रहन -सहन और सोच नहीं बदलती है। हिन्दू धर्म हर युग में बदलाव का स्वागत किया है। मातृत्व में भी युग अनुसार बदलाव आए, मगर मातृत्व की भाव और भूमिका में कोई बदलाव नहीं आए। आज की माँ के पास चुनौतियां बहुत है । लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद आज भी संस्कार देने का कार्य माँ ही करती है । आज मोबाइल और बाक़ी स्क्रीन टाइम कम करने की ज़रूरत है और परिवार के साथ समय बिताने की ज़रूरत है ।

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