नयी दिल्ली , मार्च 12 -- दिल्ली की एक अदालत ने एक ट्रैवल एजेंसी के मालिक से 12,000 रुपये की रिश्वत मांगने और लेने के जुर्म में दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल कपिल को पांच साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने बुधवार को यह सज़ा सुनाई। उन्होंने 28 फरवरी, 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोपी को दोषी ठहराया था।

कोर्ट ने सज़ा सुनाते हुए उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कहा कि दोषी एक पुलिस अधिकारी है और उससे उम्मीद की जाती है कि वह ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाएगा, लेकिन इसके बजाय वह भ्रष्टाचार में शामिल हो गया।

अदालत ने कहा, "एक सरकारी कर्मचारी के ऐसे बर्ताव की वजह से, आम आदमी का व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाता है। इसलिए, समाज को एक कड़ा संदेश देने की ज़रूरत है कि जो कोई भी इन कामों में शामिल पाया जाएगा, उसके साथ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।"दोषी नरेला औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने में बीट कांस्टेबल के तौर पर तैनात था, जब उसने शिकायतकर्ता से महीने की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता इलाके में ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं।

सीबीआई ने 12 जुलाई, 2019 को जाल बिछाया और उसे नकली नोट लेते हुए पकड़ लिया। सीबीआई की फाइल की गयी चार्जशीट के मुताबिक, शिकायत करने वाले कपिल वशिष्ठ ने 12 जुलाई, 2019 को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि बीट कांस्टेबल कपिल कई दिनों से उसकी दुकान पर आकर महीने की रिश्वत मांग रहा था और धमकी दी थी कि पैसे न देने पर उसका व्यवसाय बंद कर दिया जाएगा।

सीबीआई की कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच बातचीत रिकॉर्ड की गयी, जिससे 12,000 रुपये की मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद जाल बिछाया गया और आरोपी को शिकायतकर्ता की दुकान पर नकली नोट लेते हुए पकड़ लिया गया।

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