चंडीगढ़ , दिसंबर 30 -- पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं विधायक परगट सिंह ने मंगलवार को मनरेगा को लेकर बुलाये गये विशेष सत्र को लेकर पंजाब सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सिर्फ निंदा प्रस्ताव डालना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिल्ली जाकर केंद्र सरकार को घेरने की जरूरत है। ताकि पंजाब का नुकसान होने से रोका जा सके। उन्होंने साथ ही आप सरकार से विशेष सत्र की बजाय नियमित सत्र बुलाने की मांग रखी।
श्री सिंह ने कहा कि 12 करोड़ मजदूरों की रोजी-रोटी वाली मनरेगा योजना कांग्रेस की देन है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सभी वर्ग के गरीबों को इसका फायदा दिलाना चाहते थे। पहले यह योजना पूरी तरह केंद्र सरकार की तरफ से प्रायोजित थी। अब केंद्र में भाजपा सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर 60-40 की रेशों में बांट दिया है। राज्य सरकारें इस योजना को चलाने के लिए अपने पास से 40 फीसदी हिस्सा डालने में समक्ष नहीं है। इससे राज्य सरकारों पर 30 से 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि पहले ही कुछ राज्य सरकारें इस 100 दिन की गांरटी वाली योजना को 70 दिन ही पूरा कर पा रही हैं। पंजाब में आप सरकार चार सालों में 38 दिन और इस साल दिसंबर तक 26 दिन का रोजगार मनरेगा के तहत दे पायी है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान सात करोड़ लोग शहरों से गांवों को गये और वापस ही नहीं लौटे, जिससे कारपोरेट घरानों को मजदूर मिलने बंद हो गये। अब केंद्र सरकार सिर्फ कारपोरेट सेक्टर को खुश करने के लिए मनरेगा को खत्म करने पर तुली है, ताकि कारपोरेट घरानों को सस्ते मजदूर मिल सकें। इतना ही नहीं पंजाब में मनरेगा मजदूरों को देहाड़ी भी कम दे रही है। हम मनरेगा के तहत मजदूर को 346 रुपये दिहाड़ी दे रहे हैं, जबकि हरियाणा में यही दिहाड़ी 400 रुपये मिल रही है। पंजाब सरकार को इस तरह गौर करना चाहिए। पद्मश्री परगट सिंह ने कहा कि आप सरकार रेगुलर सेशन बुलाने की बंद कर रही है। सिर्फ स्पेशल सेशन के नाम पर एक दिन का सेशन बुलाना गलत है। उन्होंने कहा कि आनंदपुर साहिब विधानसभा सत्र में भी उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार संसद में पांच बिल लाने जा रही है। जिसमें शिक्षा बिल भी आ रहा है और उच्च शिक्षा बिल भी आ रहा है, लेकिन आप सरकार ने कोई विरोध नहीं किया। बीबीएमबी के मामले में भी आप सरकार का रवैया ढीला रहा।
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