नयी दिल्ली , दिसंबर 08 -- आपराधिक धन को ठिकाने लगाने वाले मामलों की जांच करने वाली एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली क्षेत्र के कार्यालय ने दिल्ली के तत्कालीन जल मंत्री एवं दिल्ली जलबोर्ड के चेयरमैन सत्येंद्र कुमार जैन , जल बोर्ड के तत्कालीन मुख्य अधिशासी उदित प्रकाश राय , बोर्ड के उस समय के सदस्य अजय गुप्ता और तत्कालीन मुख्य अभियंता सतीश चंद्र वशिष्ठ और निजी क्षेत्र के कुछ अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं सहित 14 लोगों के खिलाफ़ अभियोजन याचिका दर्ज की है।
ईडी की सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह शिकायत दिल्ली जल बोर्ड में सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) से जुड़ी चार निविदाओं में कथित भष्टाचार से जुड़े मामले में मनी लांड्रिंग निवारक अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत दर्ज की गयी है।।
जांच एजेंसी ने दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंटल प्राइवेट लिमिटेड (ईईपीएल) के खिलाफ़ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर इसमें मनी लांड्रिंग पक्ष की जांच शुरू की है। उक्त फर्म और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कंपनी को पप्पनकलां और निलोठी (पैकेज 1), नजफगढ़ और केशोपुर (पैकेज 2), कोरोनेशन पिलर, नरेला और रोहिणी (पैकेज 3), और कोंडली (पैकेज 4) के 10 एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और उनके उन्नयन के काम के नाम पर बोर्ड में घोटाले किये गये हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार पता चला है कि मेसर्स ईईपीएल के प्रबंध निदेशक राजकुमार कुर्रा ने डीजेबी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों नागेंद्र यादव और अन्य के माध्यम से डीजेबी टेंडर की शर्तों में हेरफेर किया। इस हेराफेरी के चलते टेंडर केवल आईएफएएस (इंटिग्रेटेड फिक्सड-फिल्म एक्टिवेटेड स्लज) और फिक्सड मीडिया आधारित जल-मल शोधन तकनीक के उपयोग के लिए सीमित हो गया और उससे उस निविदा में केवल मेसर्स ईईपीएल को तकनीक का एकमात्र आपूर्तिकर्ता बनने में मदद मिल गयी।
ईडी के अनुसार जांच से पता चला है कि ईईपीएल के कुर्रा और उनके साथियों ने बैंकिंग चैनलों और नकद के माध्यम से 6.73 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जो कानून की दृष्टि में अपराध की कमाई के अलावा और कुछ नहीं है। इस अवैध कमीशन और रिश्वत के भुगतान में फर्जी चालान हवाला चैनलों का भी उपयोग किया गया। एजेंसी के अनुसार इस टेंडर में ईईपीएल को 9.96 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ हुआ जो अपराध की कमाई है।
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