नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा प्रभुत्व और पलक झपकते ही स्थिति के अनुरूप निर्णय लेने की रणनीति की वैश्विक युद्ध परिदृश्य में बढती भूमिका के बीच भारत की रक्षा तैयारियां भी प्रौद्योगिकी में बदलाव के निर्णायक दौर से गुजर रही हैं।
सैन्य अभियानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका ऑपरेशन सिंदूर के बाद विशेष रूप से सामने आई है। इस अभियान के दौरान देश में ही विकसित 23 डिजिटल 'एप्लीकेशन' के एक समुच्चय ने परिचालन दक्षता, समन्वय और परिस्थितिजन्य जागरूकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी एआई आधारित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा की है। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को भविष्य के लिए तैयार करने में एआई के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डाला।
श्री वैष्णव ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अभियान का नाम या इसमें इस्तेमाल एआई मॉडल का नाम लिए बिना कहा कि देश के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में हाल में किए गए एआई एकीकरण से असाधारण परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी का नाम नहीं लेंगे, लेकिन पूरे विश्वास के साथ यह कह सकते हैं कि हाल के समय में देश में एक प्रमुख रक्षा घटनाक्रम के दौरान, देश में विकसित संप्रभु मॉडल का उपयोग किया गया और उससे जो परिणाम मिले, वे अत्यंत प्रभावशाली थे। उन्होंने कहा कि जिन मॉडलों का निर्माण 12 स्टार्टअप और एक आईआईटी के सहयोग से किया गया है, वे देश की लगभग सभी आवश्यकताओं के लिए उपयोगी हैं।
भारत ने गत मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों और उनके ठिकानों के खिलाफ सबसे बड़े आतंकवाद-रोधी अभियानों में से एक को अंजाम दिया। इस अभियान में पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी हमले में 26 नागरिकों की हत्या के प्रतिशोध में, सटीक योजना के तहत की गई अचूक स्ट्राइक के जरिए कुछ ही मिनटों में नौ निर्धारित लक्ष्यों को नष्ट किया गया।
डीजी ईएमई और पूर्व डीजी सूचना प्रणाली लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार सहनी ने भी गत अक्टूबर में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने खुफिया, निगरानी और लॉजिस्टिक्स संचालन को सशक्त बनाने के लिए 23 से अधिक स्वदेशी एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डेटा और इनपुट से निपटने के लिए 23 एप्लीकेशन का उपयोग किया गया और कमांडरों को एआई आधारित डेटा फ्यूजन के माध्यम से एकीकृत तस्वीर प्राप्त हो रही थी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक एप्लीकेशन एक स्पष्ट रूप से परिभाषित कार्य के लिए डिज़ाइन किया गया था और कमांडरों व अधिकारियों को उनकी परिचालन भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के अनुसार आवश्यकता के आधार पर ही इसकी पहुंच दी गई थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे परिदृश्य में, जहां कमांडर अलग-अलग स्थानों से संचालन कर रहे थे, खतरे का आकलन, आंतरिक विश्लेषण, मल्टी-सेंसर डेटा फ्यूजन और मल्टी-सोर्स कोड डेटा फ्यूजन, यह सब एआई की मदद से किया जा रहा था। संयुक्त परिचालन नियंत्रण केंद्र में गतिविधियों को समझने के लिए हीट मैप्स तैयार किए जा रहे थे, जिससे प्राथमिकताएं तय कर सटीक लक्ष्य निर्धारण संभव हो सका।
प्रमुख प्रणालियों में इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस कोलेशन एंड एनालिसिस सिस्टम शामिल है, जिसका उपयोग शत्रु के सेंसर और संचार आवृत्तियों की पहचान, ट्रैकिंग और विश्लेषण के लिए किया जाता है और जिसकी सटीकता 90 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रणाली लगभग वास्तविक समय में कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्रदान कर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूत करती है।
एक अन्य महत्वपूर्ण क्षमता वृद्धि त्रिनेत्र प्रणाली से हुई है, जिसे प्रोजेक्ट संजय के साथ एकीकृत किया गया है। यह प्रणाली सामरिक और परिचालन दोनों स्तरों पर एक साझा, वास्तविक समय की परिचालन और खुफिया तस्वीर तैयार करती है।
प्रोजेक्ट संजय एक व्यापक युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली है, जो एआई के उपयोग को सक्षम बनाती है। इसके माध्यम से स्थानीय कमांडर केंद्रीय प्रसंस्करण पर निर्भर हुए बिना वास्तविक समय के इनपुट के आधार पर त्वरित निर्णय ले सकते हैं।
फायरपावर और लक्ष्य निर्धारण के क्षेत्र में, भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से विकसित एआई सक्षम मौसम रिपोर्टिंग प्रणाली 72 घंटे का सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रदान करती है, जिससे लंबी दूरी की तोपखाना कार्रवाई में सटीकता बढ़ती है। इसके साथ ही प्रेडिक्टिव थ्रेट मॉडलिंग नामक एआई ढांचा समय, स्थान और संसाधन डेटा का विश्लेषण कर शत्रु की संभावित गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाता है, जिससे तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता में वृद्धि होती है।
सुरक्षित संचार और डेटा प्रबंधन एआई एकीकरण का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ है। एम-सिग्मा ऐप, जो एक स्वदेशी और सुरक्षित मोबाइल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है, संवेदनशील संचार के लिए व्हाट्सएप जैसे व्यावसायिक अनुप्रयोगों के स्थान पर उपयोग किया जा रहा है। यह ऐप संभव स्मार्टफोनों पर चलता है, जो संभव ओएस नामक विशेष रूप से सैन्य उपयोग के लिए डिज़ाइन किए गए सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित हैं।
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