लखनऊ , मार्च 14 -- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को दलित विरोधी सोच वाली पार्टी करार देते हुये कहा कि उसने अपने लंबे शासनकाल के दौरान दलितों के मसीहा और भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार डॉ. भीमराव आंबेडकर को उचित सम्मान नहीं दिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस ने आंबेडकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित नहीं किया, तो वह अब कांशीराम को इस उपाधि से सम्मानित करने की बात कैसे कर सकती है।

सुश्री मायावती ने एक्स पर जारी बयान में कहा, " कांग्रेस ने केंद्र में सत्ता में रहते हुए कांशीराम के निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। उस समय उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी की सरकार ने भी राजकीय शोक की घोषणा नहीं की।"उन्होने कहा, " विभिन्न राजनीतिक दल दलित समाज के नाम पर बने संगठनों का इस्तेमाल कर कांशीराम के नाम को भुनाने की कोशिश करते रहे हैं। अब भी कई दल अलग-अलग हथकंडे अपनाकर कांशीराम द्वारा स्थापित बहुजन समाज पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।"बसपा सुप्रीमो ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से ऐसी राजनीतिक कोशिशों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से सावधान रहना जरूरी है, जिसकी दलित-विरोधी सोच और मानसिकता के कारण ही बसपा का गठन करना पड़ा।

मायावती ने अपने बयान में 15 मार्च 2026 को कांशीराम की जयंती के अवसर पर बसपा द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में सफल बनाने की अपील की है।

गौरतलब है कि बसपा के संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को है। इससे पहले यूपी की सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार (13 मार्च) को लखनऊ में राहुल गांधी की मौजूदगी में मंच से प्रस्ताव रखा गया कि बसपा के संस्थापक कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाए। इस प्रस्ताव को यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक की सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है।

लखनऊ में आयोजित मान्यवर कांशीराम जयंती पर सामाजिक परिवर्तन दिवस कार्यक्रम में राहुल गांधी शामिल हुए थे । जब ये प्रस्ताव रखा गया तब राहुल गांधी मंच पर मौजूद थे।

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