दरभंगा, मार्च 31 -- बिहार में दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाबों दिग्घी, हराही और गंगासागर के सौन्दर्यीकरण को लेकर कथित मिट्टी भराई एवं निर्माण कार्य पर 'तालाब बचाओ अभियान' की ओर से दायर याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए स्वीकृत कर लिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य की एजेंसियों, विशेषकर बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) की ओर से जारी भराई कार्य न केवल राष्ट्रीय हरित अधिकरण, पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के विपरीत है, बल्कि इससे 800-900 वर्ष पुराने इन जलाशयों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। याचिकाकर्ता तालाब बचाओ अभियान ने शीर्ष अदालत से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए मिट्टी भराई पर रोक, अतिक्रमण हटाने और तालाबों को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने का आदेश देने की मांग की है।
'तालाब बचाओ अभियान' (टीबीए) की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका 25 मार्च को रिट केस के रूप में स्वीकृत हो गई है और फिलहाल सुनवाई की तिथि निश्चित नहीं हुई है। यह याचिका राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के अवमानना को लेकर दिए गए प्लीडर नोटिस के आलोक में दायर की गई है, जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
टीबीए के संयोजक नारायण चौधरी ने बताया कि तीनों तालाब गंगासागर, दिग्घी और हराही से संबंधित यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में दायर किया गया है। ये तीनों जलाशय एक ही जुड़े हुए वेटलैंड तंत्र का हिस्सा हैं, जो लगभग 1.8 किलोमीटर की लंबाई में फैले हैं और बिहार राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के अभिलेख में दर्ज हैं।
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