विशाखापट्टनम , मई 5 -- केंद्र सरकार ने दशकों तक चले लंबे संघर्ष को मान्यता देते हुए उत्तर आंध्र की सामूहिक आकांक्षाओं की पूर्ति की है और दक्षिण तटीय रेलवे क्षेत्र की स्थापना करके विशाखापट्टनम को इसका मुख्यालय बना दिया है। इसके लिए राजपत्र की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गयी है।
तेलुगु देशम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और गाजुवाका के विधायक पल्ला श्रीनिवास राव ने इस घटनाक्रम को एक "ऐतिहासिक मील का पत्थर" बताते हुये, मंगलवार को कहा कि यह कदम प्रभावी रूप से इस क्षेत्र के नेतृत्व के दृढ़ संकल्प और यहां के लोगों के सपनों की पुष्टि करता है। मीडिया से बात करते हुये, श्री श्रीनिवास राव ने इस रेलवे क्षेत्र के साकार होने का श्रेय मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के "निरंतर प्रयासों और रणनीतिक दूरदर्शिता" को दिया।
श्री श्रीनिवास राव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव का लगातार उपयोग किया कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को वास्तविकता में बदला जा सके। उन्होंने कहा, "2014 और 2019 के बीच तेदेपा सांसदों द्वारा लगाये गये 'विशाखा रेलवे जोन आंध्र का अधिकार है' नारे की गूंज को आखिरकार अपनी मंजिल मिल गयी है।" उन्होंने याद दिलाया कि इस क्षेत्र की घोषणा शुरुआत में 2019 में की गयी थी, लेकिन पिछली वाई.एस.आर.सी.पी. सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण यह परियोजना पांच वर्षों तक अटकी रही।
4 मई, 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, गुंतकल, गुंटूर और विजयवाड़ा मंडलों को शामिल करने वाला दक्षिण तटीय रेलवे क्षेत्र 1 जून से पूरी तरह कार्यरत हो जाएगा। श्री श्रीनिवास राव ने राज्य और केंद्र सरकारों के बीच समन्वय की सराहना की। उन्होंने उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और विशाखापट्टनम के सांसद एम. श्रीभरत सहित केंद्रीय मंत्रियों किंजरापु राम मोहन नायडू और डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर जैसे स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिकाओं को भी स्वीकार किया।
प्रदेश तेदेपा प्रमुख ने इस बात की पुष्टि की कि यह उपलब्धि, विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र को पुनर्जीवित करने के प्रयासों के साथ मिलकर, शहर को एक प्रमुख वैश्विक केंद्र और राष्ट्र के लिये एक महत्वपूर्ण रेलवे केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित करेगी।
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