त्रिशूर , अप्रैल 27 -- केरल में सोमवार को वडक्कुनाथन मंदिर परिसर में उस समय एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब तिरुवंबाडी और परमेक्कावु मंदिरों के दो प्रमुख देवता सजे-धजे हाथियों पर विराजमान मिले। उन्होंने हजारों भक्तों को अलविदा कहा और अगले वर्ष त्रिशूरपूरम के अवसर पर फिर से मिलने का आश्वासन दिया।
हजारों पूरम प्रेमियों ने जब यह दृश्य देखा कि दो हाथी वडक्कुनाथन मंदिर के ठीक सामने अपनी सूंड उठाकर विदाई दे रहे हैं, तो उन्हें अपनी भावनाओं पर काबू पाना मुश्किल हो गया क्योंकि आखिरकार यह उनका अपना पूरम था।
इस प्रकार रविवार सुबह शुरू हुआ 30 घंटे लंबा पूरम सोमवार की दोपहर संपन्न हो गया। इस आयोजन में वाद्य-यंत्रों की बेहतरीन प्रस्तुतियां, सजे-धजे हाथी और रंग-बिरंगी छतरियों का आदान-प्रदान मुख्य आकर्षण रहे।
उत्सव का माहौल कुछ हद तक गंभीर और शोकाकुल था क्योंकि यह आयोजन पिछले सप्ताह की शुरुआत में हुई एक आतिशबाजी निर्माण दुर्घटना की पृष्ठभूमि में हो रहा था, जिसमें 17 लोगों की मृत्यु हो गयी थी और उतने ही लोग घायल हुए थे।
इस दुखद घटना के मद्देनजर दोनों देवस्वम (मंदिर प्रबंधन समितियों) ने उत्सव के कार्यक्रमों को सीमित रखने का निर्णय लिया।
मृतकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए पूरम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण आतिशबाजी का प्रदर्शन इस बार नहीं किया गया।
उल्लेखनीय है कि त्रिशूरपूरम, जिसे 'सभी पूरमों की जननी' के रूप में जाना जाता है। एक अत्यंत भव्य और शानदार आयोजन है, जिसे देखने के लिए विदेशी नागरिकों सहित हजारों-लाखों लोग उमड़ते हैं।
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