अगरतला , जनवरी 28 -- त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) का आदिवासी विंग गुरुवार से दो दिनों के लिए अपना 23वां केंद्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा।
दरअसल माकपा ने आने वाले महीनों में होने वाले त्रिपुरा आदिवासी इलाके स्वायत्ता जिला परिषद (एडीसी) चुनावों से पहले आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। एडीसी कभी वामपंथियों का गढ़ था, लेकिन 2021 के चुनावों में यहां एक बड़ा बदलाव देखा गया।
बढ़ते तनाव और एडीसी इलाकों में सत्ताधारी टिपरा मोथा की आक्रामक मौजूदगी के बीच, माकपा का आदिवासी विंग त्रिपुरा आदिवासी गणमुक्ति परिषद (जीएमपी), गुरुवार से दो दिनों के लिए अगरतला टाउन हॉल में अपना 23वां केंद्रीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी कर रहा है।
जीएमपी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश जमातिया ने यह जानकारी देते हुए कहा कि सम्मेलन में लगभग 550 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। ये प्रतिनिधि राज्य भर के 23 उपखंडों, 157 स्थानीय समितियों और 796 इकाइयों का प्रतिनिधित्व करेंगे। एक खुले सत्र में अनुभवी माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात और माकपा के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी भाषण देंगे।
रैली के दौरान, जन कल्याण पर केंद्रित मांगों का एक चार्टर जारी किया जाएगा। श्री जमातिया ने बताया कि मुख्य मांगों में सरकारी विभागों में मौजूदा रिक्तियों को भरना, मनरेगा कार्यक्रम को फिर से शुरू करना और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक चिंताओं को दूर करना शामिल है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल संगठन की सदस्यता बढ़कर लगभग 88,000 हो गयी है। प्राथमिक स्तर से लेकर उपखंड स्तर तक के सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किये गये हैं, जिसमें युवा कार्यकर्ताओं ने उल्लेखनीय भागीदारी की है।
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