अगरतला , दिसंबर 29 -- उत्तराखंड पुलिस पर त्रिपुरा के 24 साल के व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर (एमबीए) कर रहे छात्र एंजेल चकमा और उसके छोटे भाई पर हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में देरी करने का आरोप लगा है। इस हमले में एंजेल चकमा की मौत हो गयी थी।

उल्लेखनीय है कि 9 दिसंबर को एंजेल चकमा और उसके छोटे भाई पर देहरादून में हमले हुए थे और इससे पूरे पूर्वोत्तर में आक्रोश है। त्रिपुरा में छात्र संगठन सेलाकुई इलाके में दोनों भाइयों पर हुए नस्लीय हमले के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

चकमा छात्र संगठन ने दोषियों और उत्तराखंड पुलिस के लिए कड़ी सजा की मांग करते हुए एक विरोध रैली निकाली। त्रिपुरा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी टिपराहा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन (टीआईपीआरए) की छात्र शाखा ने रविवार शाम को एंजेल के लिए न्याय की मांग करते हुए एक कैंडल मार्च निकाला।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी अपील की, जिससे घटना के तीन दिन बाद तक अपराधी गिरफ्तारी से बचते रहे। इस देरी के कारण मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी नेपाल भाग गया, जिससे और आलोचना हुई है। युवा टिपरा संघ (वाईटीएफ) के अध्यक्ष सूरज देबबर्मा ने बताया कि 26 दिसंबर तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। भारतीय पुलिस सेवा के एक अवकाशप्राप्त अधिकारी के दखल के बाद ही छह संदिग्धों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

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