तेहरान , मार्च 27 -- ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के 28वें दिन शुक्रवार को तेहरान, इस्फहान और आसपास के क्षेत्रों में कई हवाई हमले किए गए, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गयीं।

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने इन धमाकों को "तीव्र और व्यापक" बताया।

इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने कहा कि उसने ईरान के सैन्य ढांचे को निशाना बनाते हुए समन्वित हमलों की एक श्रृंखला शुरू की। इज़राइली सेना के अनुसार, हवाई हमलों में तेहरान के हथियार निर्माण केंद्रों और पश्चिमी ईरान में मिसाइल भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया।

एक अलग बयान में आईडीएफ ने कहा कि उसकी वायु सेना ने मध्य ईरान के यज़्द में स्थित "मिसाइल और समुद्री बारूदी सुरंगों के उत्पादन की प्रमुख सुविधा" पर भी हमला किया। सेना का दावा है कि यह केंद्र ईरानी नौसेना के मिसाइल और समुद्री माइंस कार्यक्रम का अहम हिस्सा है।

आईडीएफ के अनुसार, तेहरान में हमले बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन से जुड़े ठिकानों पर केंद्रित थे, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में इज़राइली वायु सेना ने मिसाइल लॉन्चर और भंडारण स्थलों को नष्ट किया। इन कार्रवाइयों को इज़रायल ने ईरान की सैन्य क्षमताओं के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा बताया है।

इसी बीच, संघर्ष के तेज होने के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के बाद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान की लगभग 90 प्रतिशत मिसाइल क्षमता और उसकी नौसेना व वायुसेना के बड़े हिस्से को निष्क्रिय कर दिया है।

श्री ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान बातचीत से इनकार करता है तो अमेरिका सैन्य दबाव जारी रखेगा। उन्होंने ईरान को "कमजोर लड़ाके लेकिन अच्छे वार्ताकार" बताया, हालांकि ईरान ने अमेरिकी वार्ता प्रयासों को बार-बार खारिज किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को 10 दिनों के लिए अस्थायी रूप से रोका गया है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है।

अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की कि पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसका उद्देश्य युद्धविराम कराना है।

श्री विटकॉफ ने कहा, "ये संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत हैं और इनके विशेष बिंदुओं की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है। हम देखेंगे कि स्थिति किस दिशा में जाती है और क्या हम ईरान को यह समझा सकते हैं कि उनके पास बेहतर विकल्प नहीं है, अन्यथा और अधिक जान-माल का नुकसान होगा।"श्री ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में ईरान को और अधिक सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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