नयी दिल्ली , दिसंबर 11 -- तेलंगाना सरकार ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि पूर्व बीआरएस सरकार के दौरान राजनेताओं और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की जासूसी से जुड़े हाई-प्रोफाइल फोन टैपिंग मामले में आरोपी पूर्व खुफिया प्रमुख टी. प्रभाकर राव जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि श्री राव का सहयोग केवल कागजों पर ही था। अधिवक्ता लूथरा ने अदालत को बताया, "उन्होंने सिर्फ कागजी सहयोग किया है। या तो उपकरण खुल नहीं रहे हैं या फिर उनका डेटा मिटा दिया गया है। इसलिए यह सब व्यर्थ का प्रयास है।"न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ राव की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
राज्य ने न्यायालय से राव को पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को रद्द करने का आग्रह किया। हालांकि पीठ ने मामले को कल सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया और राव की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा को कल तक के लिए बढ़ा दिया।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि राव ने 13 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय के पहले के निर्देश का पालन नहीं किया, जिसमें उन्हें राज्य के फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में अपने सभी आईक्लाउड खातों के पासवर्ड रीसेट करने और प्रदान करने के लिए कहा गया था।
राज्य सरकार के अनुसार, राव के पास पांच आईक्लाउड खाते थे लेकिन उन्होंने केवल दो को रीसेट किया और वे खाते भी खाली पाए गए क्योंकि कथित रूप से डेटा हटा दिया गया था। राज्य ने तर्क दिया कि यह आचरण न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को नष्ट करने के बराबर है।
हालांकि बेंच ने शुरू में संकेत दिया था कि वह जनवरी में इस मामले पर सुनवाई कर सकती है लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता लूथरा ने राव के कथित असहयोग को देखते हुए शुक्रवार को ही मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया। बेंच ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और मामले को 12 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया और तब तक अंतरिम सुरक्षा जारी रखी।
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