नयी दिल्ली , फरवरी 06 -- उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से जुड़ी लंबित अयोग्यता अर्जियों पर तीन हफ़्ते के अंदर "सकारात्म्क" फैसला करने का आदेश देते हुए कहा कि ऐसा न करने पर अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ अपने 31 जुलाई, 2025 के आदेश के तहत अनुपालन कार्रवाई की सुनवाई कर ही थी, जिसके तहत अध्यक्ष को कथित तौर पर कांग्रेस में शामिल हुए दस बीआरएस विधायकों को अयोग्यता की मांग करने वाली अर्जियों पर फैसला करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। अध्यक्ष समय सीमा का पालन करने में नाकाम रहे, इसलिए अदालत में अवमानना याचिका दायर की गईं।

अदालत ने कहा कि दिसंबर 2025 में सात याचिका पर फैसला किया गया और उन्हें खारिज कर दिया गया, जबकि तीन अर्जियां अभी भी लंबित हैं।

सुनवाई के दौरान, तेलंगाना राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायालय को बताया कि एक लंबित मामले में अब फैसला हो चुका है, जबकि बाकी दो में फैसले अंतिम चरण पर हैं। उन्होंने संबंधित मामले में चल रही प्रगति का हवाला देते हुए तीन हफ़्ते का समय मांगा। यह भी बताया गया कि नगर निगम चुनाव चल रहे हैं और दूसरी तरफ से पहले भी समय मांगा गया था।

एक याचिका के वकील ने बार-बार टाले जाने पर एतराज़ जताया और कहा कि अध्यक्ष ने कई बार समय मांगा था और काफी सुनवाई हो चुकी है, फिर भी देरी गलत थी।

पीठ ने देखा कि पिछली सुनवाई में हालांकि अध्यक्ष ने तीन हफ़्ते मांगे थे, लेकिन न्यायालय ने सिर्फ़ दो हफ़्ते का समय दिया। यह देखते हुए कि अब कम से कम एक फैसला हो चुका है, अदालत ने तीन हफ़्ते का आखिरी बार समय दिया।

पीठ ने आदेश दिया, "हमें उम्मीद है कि अध्यक्ष सकारात्मक फैसला लेंगे। ऐसा न होने पर हम अवमानना जारी करने की कार्रवाई करेंगे।"न्यायमूर्ति करोल ने आदेश सुनाने के बाद याचिकाकर्ता से इस मामले पर सोशल मीडिया रील न बनाने का आग्रह करते हुए एक मौखिक टिप्पणी की और कहा कि इस तरह के तरीके से "एक नयी इंडस्ट्री" बन रहे हैं।

अयोग्यता की कार्रवाई वेंकट राव तेलम, कडियम श्रीहरि और दानम नागेंद्र से जुड़ी है, जो 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में बीआरएस टिकट पर विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।

विधानसभा अध्यक्ष पर लंबे समय तक कोई निर्णय न लेने का आरोप लगाते हुए बीआरएस विधायक कुना पांडु विवेकानंद और पाडी कौशिक रेड्डी, भाजपा विधायक अल्लेटी महेश्वर रेड्डी के साथ तेलंगाना उच्च न्यायालय गए। उन्होंने कहा कि अयोग्यता की अपीलों पर फैसला करने में देरी से और ज़्यादा दलबदल हो सकता है।

नौ सितंबर, 2024 को उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने अध्यक्ष को चार हफ़्ते के अंदर याचिका पर सुनवाई का शेड्यूल तय करने का निर्देश दिया। इस आदेश को नवंबर 2024 में पीठ ने रद्द कर दिया, जिसने कहा कि अध्यक्ष को आवदेनों पर "सही समय" के अंदर फैसला करना होगा।

याचिकाकर्ताओं ने पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जुलाई 2025 में शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय की पीठ के फैसले को रद्द कर दिया और अध्यक्ष को सभी अयोग्यता आवेदनों पर तीन महीने के अंदर फैसला करने का निर्देश दिया।

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