रायपुर/तेलंगाना , फरवरी 22 -- तेलंगाना में माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय समिति के वरिष्ठ सदस्य देवजी उर्फ तिरुपति ने 18 अन्य माओवादियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है।

संगठन के वर्तमान में सबसे बड़े सक्रिय कमांडरों में शामिल देवजी का सरेंडर माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार लंबे समय से सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन ऑपरेशन, नेटवर्क पर लगातार प्रहार और बढ़ती घेराबंदी के कारण माओवादी नेतृत्व के भीतर हताशा की स्थिति बनती जा रही थी। देवजी जैसे शीर्ष कमांडर का आत्मसमर्पण संगठन की रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक कमजोरी को उजागर करता है। यह घटनाक्रम दक्षिण बस्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी ढांचे पर व्यापक असर डाल सकता है।

माओवादी कमांडर के आत्मसमर्पण पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बसव राजू के बेअसर होने के बाद देवजी संगठन का बड़ा चेहरा था, जिसने अब आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि देवजी ने तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया है, ऐसी सूचना प्राप्त हुई है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा, ''कुछ और नाम शेष हैं जो निष्क्रिय हो चुके हैं, उन्हें भी सरेंडर कराया जाएगा। उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। बैंकिंग सुविधा, शादी-विवाह, खेती-किसानी और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।''पिछले कुछ महीनों में कई बड़े माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है, जो संगठन की कमजोर पड़ती पकड़ का संकेत माना जा रहा है। सुजाता उर्फ कल्पना उर्फ पोथुला पद्मावती (किसनजी की पत्नी) - केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम), 13 सितंबर 2025, हैदराबाद, तेलंगाना मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति - पोलित ब्यूरो सदस्य/सीसीएम (पीबीएम/सीसीएम), 14 अक्टूबर 2025, गढ़चिरौली, महाराष्ट्रसतीश उर्फ रूपेश उर्फ टक्कलपल्ली वासुदेव राव - सीसीएम , 17 अक्टूबर 2025, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ पुलुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना - सीसीएम, 29 अक्टूबर 2025, हैदराबाद, तेलंगाना रामदर मज्जी उर्फ सोमा - सीसीएम, 8 दिसंबर 2025, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ , देवजी उर्फ तिरुपति - पोलित ब्यूरो सदस्य/सीसीएम 22 फरवरी 2026, तेलंगाना।

विशेषज्ञों का मानना है कि पोलित ब्यूरो स्तर के नेताओं के लगातार आत्मसमर्पण से संगठन की रणनीतिक योजना, कैडर प्रबंधन और क्षेत्रीय समन्वय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इससे न केवल संगठनात्मक ढांचा कमजोर होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय दस्तों का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है।

सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता के रूप में देख रही हैं। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि जो भी माओवादी मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन के लिए हरसंभव सहायता दी जाएगी।

देवजी का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बदलते हालात में माओवादी नेतृत्व के सामने विकल्प सीमित होते जा रहे हैं और मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित