कोलकाता , अप्रैल 07 -- पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल की तटस्थता पर नए सवाल उठाए हैं।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि नंदीग्राम के हालिया दौरे के दौरान श्री अग्रवाल के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक स्थानीय नेता मौजूद थे।
श्री अग्रवाल ने पिछले शनिवार को नंदीग्राम का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने चुनाव तैयारियों के हिस्से के रूप में कई क्षेत्रों का भ्रमण किया था और स्थानीय निवासियों से बातचीत की थी।
तृणमूल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और पार्टी नेता कुणाल घोष ने श्री अग्रवाल की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने इस दौरे की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया गया है कि सीईओ के साथ एक भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद थे।
पार्टी ने आरोप लगाया कि तस्वीर में प्रमुखता से दिख रहे व्यक्ति तपन कुमार महापात्र है, जो नंदीग्राम के कालीचरणपुर के भाजपा संयोजक और विपक्ष के नेता एवं भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी हैं।
श्री घोष ने कहा, "मुख्य निर्वाचन अधिकारी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ घूम रहे थे। यह दिखाता है कि चुनाव आयोग कैसे काम कर रहा है। यह पूरी तरह से पक्षपात है।" उन्होंने यह भी सवाल किया कि श्री अग्रवाल ने अपने जिला दौरों की शुरुआत नंदीग्राम जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र से ही क्यों की।
दूसरी ओर भाजपा ने आसपास के क्षेत्र में श्री महापात्र की मौजूदगी से इनकार नहीं किया, लेकिन किसी भी अनुचित व्यवहार के आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं ने सीईओ का बचाव करते हुए कहा कि वह तटस्थता और प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।
नंदीग्राम के एक भाजपा नेता ने कहा कि अग्रवाल पहले ऐसे सीईओ हैं जो निष्पक्ष रूप से काम कर रहे हैं और उन्होंने आम लोगों का विश्वास जीता है। उन्होंने कहा, " श्री महापात्र की उपस्थिति व्यक्तिगत क्षमता में थी और इसका पार्टी की गतिविधियों से कोई संबंध नहीं था।" भाजपा के अनुसार, श्री महापात्र राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि सीईओ के काम के प्रति प्रशंसा भाव के कारण वहां गए थे।
यह विवाद चुनावों से पहले कथित पक्षपात को लेकर तृणमूल और चुनाव आयोग के बीच चल रहे तनाव के बीच सामने आया है। सत्तारूढ़ दल ने पहले भी जनरल ऑब्जर्वर और पुलिस ऑब्जर्वर सहित कई अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और भाजपा के साथ संबंधों का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज की हैं। कुछ मामलों में, आयोग ने ऐसे आरोपों के बाद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।
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