सिलीगुड़ी , मार्च 28 -- पश्चिम बंगाल में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता एथलीट स्वप्ना बर्मन ने विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर उत्पन्न बाधा को पार कर लिया है।
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने श्रीमती बर्मन को तृणमूल कांग्रेस जलपाईगुड़ी जिले की राजगंज विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। अभी तक उनके चुनाव लड़ने पर संशय बरकार था क्योंकि इस्तीफे के बाद उन्हें रेलवे अधिकारियों से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (एनओसी) हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ा।
वह पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में अलीपुरद्वार में कार्मिक विभाग में 'स्टाफ एवं कल्याण निरीक्षक' (लेवल-6) के पद पर कार्यरत थीं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होने के बाद एक कानूनी बाधा बन गई। स्थिति तब और भी जटिल हो गई, जब रेलवे अधिकारियों ने उन्हें 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया और बाद में उनके खिलाफ 'बड़ी दंडात्मक कार्रवाई' का आरोप तय कर दिया, जिसके चलते मौजूदा नियमों के तहत उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाना प्रभावी रूप से रुक गया था।
चुनावी भविष्य को अधर में लटका देख श्रीमती बर्मन ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए जलपाईगुड़ी स्थित कलकत्ता उच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठ का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति गौरांग कंठे ने 'स्वप्ना बर्मन बनाम वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी और अन्य' नामक मामले में कई दिनों तक (24, 25 और 27 मार्च को )सुनवाई की। श्रीमती बर्मन ने 16 मार्च को दिए गए अपने इस्तीफे को स्वीकार करने और उसी महीने की शुरुआत में उनके खिलाफ शुरू की गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई को समाप्त करने की याचिका दायर की।
न्यायमूर्ति कंठे ने शुक्रवार को अपने आदेश में रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 30 मार्च तक उनकी सेवा समाप्ति (टर्मिनेशन) के संबंध में अंतिम निर्णय लें और बिना किसी देरी के उस निर्णय से उन्हें अवगत कराएं।
रेलवे अधिकारियों के कानूनी प्रतिनिधियों के अनुसार श्रीमती बर्मन द्वारा अपनी सेवा समाप्त करने का अनुरोध करते हुए एक नया आवेदन जमा करने के बाद यह मामला अब सुलझ गया है। अधिकारियों ने बताया कि उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है, जिससे रेलवे के साथ उनका जुड़ाव प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है और उनके लिए चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि इसके लिए उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के अधिकार को छोड़ना पड़ा है।
श्रीमती बर्मन को लेकर तृणमूल कांग्रेस में भी उथल-पुथल मचा। उनके नामांकन से मौजूदा विधायक खगेश्वर रॉय ( जो चार बार विधायक रह चुके हैं) ने नाराजगी जतायी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति पर अपनी असंतोष व्यक्त किया। इस आंतरिक कलह ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए कि श्रीमती बर्मन को अपने चुनाव प्रचार के दौरान जमीनी स्तर पर कितना समर्थन मिल पाएगा।
वह हाल ही में हुए पिता के हाल ही में हुए निधन के दुख से भी जूझ रही हैं। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर थे और वैन रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। इस भावनात्मक आघात के बावजूद, वह अब पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर अपना चुनाव प्रचार शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।
भारतीय एथलेटिक्स में एक जाना-माना नाम श्रीमती बर्मन 2018 एशियाई खेलों में हेप्टाथलॉन में स्वर्ण पदक जीतने के बाद सुर्खियों में आईं और उन्होंने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसमें 2022 राष्ट्रीय खेलों में कई स्वर्ण पदक जीतना भी शामिल है। खेल जगत से राजनीति में उनके इस बदलाव पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है, खासकर ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जहाँ संगठनात्मक एकता उतनी ही महत्वपूर्ण साबित हो सकती है जितनी कि जनता के बीच उनकी लोकप्रियता।
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