चेन्नई , जनवरी 25 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महिला कर्मचारी तीसरी गर्भावस्था के लिए भी सभी लाभों के साथ प्रसूति अवकाश की हकदार हैं।

न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार और न्यायमूर्ति शमील अहमद की खंडपीठ ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि अदालत द्वारा कई आदेश पारित किए जाने के बावजूद अधिकारी तीसरी गर्भावस्था के लिए प्रसूति अवकाश देने से इनकार कर रहे हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि महिला कर्मचारियों को तीसरी गर्भावस्था के दौरान भी प्रसूति अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता है।

पीठ ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को यह निर्देश भी दिया कि वे इस आदेश को राज्य सरकार के सभी विभागाध्यक्षों के बीच प्रसारित करें ताकि भविष्य में इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

न्यायाधीशों ने पाया कि स्वयं उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (प्रबंधन) ने अदालत की कर्मचारी पी. मंगैयारकरासी को प्रसूति अवकाश देने से मना कर दिया था, जबकि उन्हें सूचित किया गया था कि उच्च न्यायालय ने इसी तरह के एक मामले में तीसरी गर्भावस्था के दौरान भी ऐसा लाभ देने का आदेश दिया था।

खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भी निर्देश दिया कि वे इस आदेश की एक प्रति राज्य भर की जिला न्यायपालिका के उन सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजें, ताकि अदालत के कर्मचारियों के संबंध में इसका सख्ती से पालन हो सके।

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