चेन्नई , फरवरी 11 -- तमिलनाडु पुलिस की प्रतिमा शाखा ने चोरी की गयी धातु की दो प्राचीन मूर्तियां बरामद करते हुए मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

इनमें से एक प्रतिमा भगवान सुदर्शनर (भगवान विष्णु) और दूसरी देवी की है। प्रतिमा शाखा की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, त्रिची के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जी. बालमुरुगन के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने तंजावुर-चेन्नई राष्ट्रीय राजमार्ग पर वलयापेट्टै गांव के पास बुधवार को अचानक वाहन जांच के दौरान इन मूर्तियों को बरामद किया।

जांच के दौरान सड़क किनारे खड़ी एक मारुति सुजुकी अर्टिगा कार की तलाशी लेने पर बोरे में लिपटी दो धातु की मूर्तियां मिलीं। वाहन में मौजूद चालक और एक अन्य व्यक्ति से पूछताछ की गयी, लेकिन वे मूर्तियों के स्वामित्व से संबंधित कोई दस्तावेज या संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके।

प्रारंभिक जांच में मूर्तियां प्राचीन, कलात्मक दृष्टि से मूल्यवान तथा तमिलनाडु शैली की प्रतीत हुईं, जिनके किसी मंदिर से चोरी होने का संदेह है। आगे की पूछताछ में सामने आया कि मणिकंदन और रामचंद्रन अपने साथियों के साथ मिलकर इन चोरी की मूर्तियों को छिपाकर विदेश तस्करी करने की कोशिश कर रहे थे, ताकि इन्हें भारी कीमत पर बेचा जा सके।

महजर के तहत 77.300 किलोग्राम वजनी, 90 सेंटीमीटर ऊंची और 48 सेंटीमीटर चौड़ी भगवान सुदर्शनर उर्फ विष्णु की धातु मूर्ति (जिसकी आगे की दो उंगलियां क्षतिग्रस्त हैं और सिर के ऊपर ज्वाला वाला हिस्सा कटा हुआ है), 35.450 किलोग्राम वजनी, 73 सेंटीमीटर ऊंची और 31 सेंटीमीटर चौड़ी देवी की मूर्ति, संबंधित कार तथा मूर्तियों को ढकने में प्रयुक्त दो बोरे जब्त किये गये।

प्रतिमाएं जब्त करने के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(1)(ए) और 106 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 305(डी) के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी स्वीकारोक्ति के आधार पर वी. मुगिलन और एस. जॉनसन नाम के दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।

सभी चारों आरोपी तिरुवरूर जिले के निवासी हैं। उन्हें कुंभकोणम स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और बाद में कुंभकोणम उप-जेल में दाखिल किया गया। पुलिस शेष आरोपियों की गिरफ्तारी और मूर्तियों के मूल स्रोत का पता लगाने के प्रयासकर रही है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, ये मूर्तियां 14वीं-15वीं शताब्दी के विजयनगर काल की दुर्लभ प्रतिमाएं हैं।

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