चेन्नई , मार्च 22 -- तमिलनाडु में तमिलगा वाझवुरिमई काची' (टीवीके) ने रविवार को सत्ताधारी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने की घोषणा की।

टीवीके ने सत्ताधारी दल के 'बड़े भाई' वाले रवैये का विरोध किया और स्टालिन सरकार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों द्वारा चलाए जाने का आरोप लगाया। वहीं, मार्क्सवादी पार्टी ने अभी तक मुख्यमंत्री द्वारा 23 अप्रैल को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में लड़ने के लिए दी गयी पांच सीटों की पेशकश पर कोई फैसला नहीं लिया है।

मार्क्सवादियों और दलित संगठन 'विदुथलाई चिरुथाइगल काची' (वीसीके) की ओर ज़्यादा सीटों की मांग के चलते द्रमुक के लिए सीटों के बंटवारे की प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है।

द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में 'वन्नियार' समुदाय का चेहरा माने जाने वाले टीवीके के संस्थापक-अध्यक्ष टी. वेलमुरुगन ने यहां पत्रकारों से कहा, "हमारे प्रति द्रमुक का रवैया 'बड़े भाई' जैसा था। हम अपनी पार्टी के साथ इस तरह के बर्ताव को बर्दाश्त नहीं कर सकते। हम गठबंधन इसलिए नहीं छोड़ रहे हैं कि पिछली बार के मुकाबले ज़्यादा सीटों की हमारी मांग ठुकरा दी गई, बल्कि इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि हमारी 10-सूत्रीय मांगों का चार्टर स्वीकार नहीं किया गया।"तमिल राष्ट्रवाद का समर्थन करने वाली टीवीके का जनाधार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वन्नियार समुदाय के बीच है, खासकर कुड्डालोर, नेवेली और चिदंबरम के साथ-साथ विलुप्पुरम ज़िलों में। यह पार्टी सत्ताधारी द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ चुनावी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।

कुड्डालोर ज़िले के पनरुति से मौजूदा विधायक टी. वेलमुरुगन ने "हम 2019 के लोकसभा चुनावों से ही द्रमुक के साथ हैं। सीटों के बंटवारे पर पहली बातचीत के दौरान द्रमुक ने हमें सिर्फ़ एक सीट देने की पेशकश की थी, लेकिन हमने और सीटों की मांग की। हमने अपनी मांगों का एक चार्टर भी सौंपा था, जिसमें तमिल लोगों को रोज़गार में प्राथमिकता देने के लिए कानून बनाना, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना करवाना और अन्य मांगों के साथ-साथ वन्नियार समुदाय के लिए 10.5 प्रतिशत का विशेष आरक्षण तय करना शामिल था। सरकार ने हमारी इन मांगों को नज़रअंदाज़ कर दिया है।" उन्होंने इन्हीं सभी बातों को कई पार्टियों वाले और मज़बूत द्रमुक नीत 'धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन' (एसपीए) को छोड़ने की वजह बतायी।

इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है, उसे आरएसएस से जुड़े लोग चला रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम सांप्रदायिक और समाज को बांटने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) -नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल नहीं होंगे।" उन्होंने कहा कि टीवीके उन पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना तलाशेगी, जो टीवीके की मांगों के चार्टर को स्वीकार करने के लिए तैयार होंगी।

इस बीच, माकपा के लिए टीवीके के गठबंधन से बाहर जाने से एक छोटा सा अवसर पैदा हो गया है। पार्टी ने कहा है कि वह द्रमुक द्वारा की गयी पांच सीटों की पेशकश पर फिर से विचार-विमर्श करेगी। वर्ष 2021 में, माकपा ने द्रमुक के साथ मिलकर छह सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे सिर्फ़ दो सीटों पर ही जीत मिली थी। ऐसे में, द्रमुक की मौजूदा पेशकश से पार्टी थोड़ी असहज महसूस कर रही थी। शुरुआत में, इस वामपंथी पार्टी ने दो अंकों (यानी 10 से ज़्यादा) में सीटों की मांग की थी, लेकिन, जब द्रमुक ने उनकी इस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया, तो उन्होंने अपनी मांग घटाकर छह कर दी।

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