बैतूल , मार्च 12 -- तमिलनाडु के इरोड जिले में बंधुआ बनाकर रखे गए मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के 20 श्रमिकों को प्रशासनिक समन्वय से मुक्त कराकर सुरक्षित बैतूल लाया गया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, बैतूल जिला प्रशासन और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त प्रयासों से किए गए रेस्क्यू के बाद गुरुवार को सभी श्रमिक बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने श्रमिकों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
अधिकारियों ने श्रमिकों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी हर संभव सहायता करेगा और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की गई और उन्हें उनके गृह ग्राम तक पहुंचाने के लिए बसों तथा भोजन की व्यवस्था की गई।
कलेक्टर सूर्यवंशी ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए कहा कि प्रशासन उनके पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि सभी श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता के लिए आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए जाएं, ताकि उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके।
जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने बताया कि ये श्रमिक काम के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और उनसे जबरन काम कराया जा रहा था। मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य प्रकाश उइके के माध्यम से प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद बैतूल प्रशासन ने इरोड जिला प्रशासन से संपर्क कर सभी श्रमिकों को मुक्त कराया।
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन की ओर से 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। जानकारी के अनुसार कुल 24 श्रमिकों में से 20 बैतूल और चार हरदा जिले के निवासी हैं।
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