चेन्नई , अप्रैल 11 -- तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में कुल 4,023 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे।

उम्मीदवारों की संख्या तय होने के साथ ही 234 सदस्यों वाली विधानसभा को चुनने के लिए होने वाले इन बेहद रोमांचक चुनावों की बिसात साफ तौर पर बिछ गई है, जिसमें कई पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला नजर आ रहा है। सीटों के बंटवारे, निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान, उम्मीदवारों के नाम तय करने, नामांकन दाखिल करने, उनकी जांच और नाम वापस लेने की चुनाव-पूर्व प्रक्रिया समाप्त हो गई, अब एक जोरदार चौतरफा मुकाबले के लिए मंच तैयार है। इसे 'बुद्धिमत्ता की लड़ाई' और चुनावी मैदान में 'बिना किसी रोक-टोक के होने वाला मुकाबला' कहा जा रहा है।

चुनाव मैदान में उतरे चारों प्रमुख मोर्चों के नेताओं ने चिलचिलाती गर्मी की परवाह किए बिना अपना तूफानी चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। वे मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में राज्य के हर जिले और कोने-कोने का दौरा कर रहे हैं।

राज्य में 09अप्रैल को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख खत्म होने के बाद पिछले दो दिनों में अपने पोर्टल पर लगातार अपडेट देने के बाद चुनाव आयोग ने बताया कि 500 से अधिक उम्मीदवारों द्वारा अपने नामांकन वापस लेने के बाद कुल 4,023 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। दाखिल किए गए कुल रिकॉर्ड 7,599 नामांकनों (6216 पुरुष और 1380 महिलाएं) में से जांच के दौरान 2,460 नामांकन खारिज कर दिए गए।

कुल 234 सीटों में से करूर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 79 उम्मीदवार हैं। जबकि अंबासमुद्रम और किनाथुकाडावु सीटों पर सबसे कम, हर सीट पर पांच उम्मीदवार हैं। वहीं ऊधगमंडलम, कुन्नूर और गुडलूर निर्वाचन क्षेत्रों में हर सीट पर छह उम्मीदवार हैं।

चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के बाद चुनावों के लिए कुल 326 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। इनमें 136 सामान्य पर्यवेक्षक, 40 पुलिस पर्यवेक्षक और 150 व्यय पर्यवेक्षक हैं।

आयोग ने पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि चुनाव उत्सव के माहौल में, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हों और किसी भी तरह के प्रलोभन, धमकी या हिंसा से मुक्त हों। साथ ही चुनाव प्रचार पर होने वाले खर्च की भी बारीकी से निगरानी की जाए।

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