चेन्नई , अप्रैल 27 -- तमिलनाडु में पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अंबुमणि रामदास ने 29 अप्रैल को होने वाली कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण (सीएमए) की बैठक को तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी में नयी सरकारों के गठन तक टाल देने की मांग की है।
श्री रामदास ने कर्नाटक पर कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध निर्माण परियोजना पर चर्चा करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने यहां जारी एक बयान में कहा है कि यह घोषणा की गयी है कि कावेरी नदी में तमिलनाडु और पुड्डुचेरी को पानी छोड़ने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सीएमए की 50वीं बैठक 29 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में इस बैठक को आयोजित करना अस्वीकार्य है, जहां कावेरी नदी जल प्राधिकरण के सदस्य राज्यों तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और केरल में पूरी तरह से अधिकार-संपन्न सरकारें नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि सीएमए की बैठक में केवल कावेरी न्यायाधिकरण और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के आधार पर कर्नाटक के बांधों से तमिलनाडु को पानी उपलब्ध कराने के मुद्दे पर ही चर्चा होती है, तो इसमें कोई समस्यानहीं होगी।
कर्नाटक सरकार जो कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध बनाने की अनुमति, भले ही परोक्ष रूप से ही सही, पाने के लिए उत्सुक है, ने कथित तौर पर मौजूदा स्थिति का लाभ उठाने का फैसला किया है और इस बात पर जोर दिया है कि 29 अप्रैल की बैठक में मेकेदातु बांध के मुद्दे पर चर्चा की जाए और निर्णय लिया जाये।
डॉ. रामदास ने कहा, " यदि बैठक में मेकेदातु बांध पर चर्चा होती है, तो बैठक में भाग लेने वाले जल संसाधन सचिव को इस बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं दिये गये हैं कि उन्हें तमिलनाडु की ओर से क्या रुख अपनाना है। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव समाप्त हो चुके हैं और परिणाम अभी घोषित होने बाकी हैं, ऐसे में मौजूदा सरकार कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकती। ऐसी स्थिति में, यदि बैठक में भाग लेने वाले अधिकारी कोई गलत रुख अपना लेते हैं, तो इससे तमिलनाडु को भारी नुकसान होगा।"उन्होंने कहा कि पुड्डुचेरी और केरल में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। 2019 में केंद्रीय जल संसाधन आयोग ने सीएमए से कहा था कि वह कर्नाटक सरकार की मेकेदातु बांध निर्माण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर, मेकेदातु बांध के निर्माण की अनुमति देने की सिफारिश करे। पीएमके सहित तमिलनाडु के विभिन्न दलों के कड़े विरोध के कारण, तमिलनाडु सरकार ने आपत्ति जतायी थी कि सीएमए की बैठकों में कर्नाटक की डीपीआर रिपोर्ट पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए।
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