बेंगलुरु , फरवरी 10 -- फिल्म अभिनेत्री तमन्ना को मैसूर संदल साबुन का ब्रांड एंबेसडर बनाने के कर्नाटक सरकार के फैसले से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद डॉ. के. सुधाकर ने कांग्रेस सरकार पर स्थानीय प्रतिभाओं को दरकिनार कर "कन्नड़-विरोधी सोच" दिखाने का आरोप लगाया है।
डॉ. सुधाकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंगलवार को मैसूर संदल का प्रतिनिधित्व करने के लिए कर्नाटक के बाहर से किसी कलाकार को चुनने के पीछे के कारण पर सवाल उठाया। मैसूर संदल एक विरासत ब्रांड है जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक छवि से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार राज्य से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने अभिनेताओं के होने के बावजूद एक सही कन्नड़ फिल्म कलाकार नहीं ढूंढ पायी।
डॉ. सुधाकर ने आरोप लगाया कि यह फैसला कन्नड़ भाषा, संस्कृति और स्थानीय गौरव के प्रति अनदेखी का चलन दिखाता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से जनता की भावनाओं को ठेस पहुंची है, क्योंकि मैसूर संदल सिर्फ एक वाणिज्यिक उत्पाद नहीं है, बल्कि कर्नाटक की विरासत का एक भावनात्मक प्रतीक है। डॉ. सुधाकर ने सरकार की आलोचना की कि वह सरकारी पैसा खर्च कर रही है और उन जाने-माने कन्नड़ कलाकारों को नज़रअंदाज़ कर रही है, जिन्होंने कई फ़िल्म उद्योगों में लगातार कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों को नज़रअंदाज़ करना मैसूर संदल की पहचान को कमज़ोर करने जैसा है।
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