नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि देश के प्रमुख तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थानों का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
श्री प्रधान ने आज यहां राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान ( एनआईटीएसईआर) की 13वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के प्रमुख तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थानों का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि पीएचडी कार्यक्रम उद्योग-केंद्रित हों, ताकि शोध सीधे तौर पर रोजगार सृजन, नवाचार और राष्ट्रीय विकास से जुड़ सके। इसके लिए उन्होंने नए और उभरते रोजगार क्षेत्रों तथा 21वीं सदी की जरूरतों के आधार पर उद्योग-नेतृत्व वाली पाठ्यक्रम समितियों के गठन का आह्वान किया।
उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) और भारतीय इंजीनियरिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान ( आईआईईएसटी) में शैक्षणिक एवं अनुसंधान मानकों को ऊंचा उठाने, शासन दक्षता बढ़ाने और नवाचार-उद्यमिता को प्रोत्साहित करने से संबंधित प्रस्तुतियों की समीक्षा की। उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों को मान्यता (एक्रेडिटेशन) प्रणाली के दायरे में आना चाहिए।
श्री प्रधान ने कहा कि एनआईटी, आईआईएसईआर और आईआईईएसटी व्यावहारिक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के विकास के जीवंत केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये संस्थान विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने और राष्ट्रीय प्रगति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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