नयी दिल्ली , जनवरी 31 -- तंबाकू उत्पादों पर बढ़े कर एवं अधिभार रविवार 01 फरवरी से लागू हो जायेंगे जिससे सिगरेट, पान-मसाला आदि महंगे हो जायेंगे।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने पिछले साल 03 सितंबर को अधिकतर वस्तुओं पर कर की नयी दरों की घोषणा की थी। अन्य सभी उत्पादों पर नयी दरें 22 सितंबर 2025 से लागू हो गयी थीं, लेकिन तंबाकू पान-मसाला, सिगरेट-बीड़ी आदि पर ये दरें 01 फरवरी 2026 से लागू होंगी। जीएसटी में इन उत्पादों पर अधिभार रविवार से शून्य हो जायेगा, लेकिन इसकी जगह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक इन उत्पादों के सेवन को हतोत्साहित करने के लिए नये अधिभार लगाये जायेंगे और उत्पाद शुल्क बढ़ाये जायेंगे।
बीड़ी-सिगरेट और हुक्का-चुरुट में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू पर उत्पाद शुल्क 64 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया जायेगा। वहीं, तंबाकू के अपशिष्ट पर शुल्क 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जायेगा। सिगार, चुरुट और सिगरिलोज पर उत्पाद शुल्क 12.5 फीसदी या प्रति हजार 4,006 रुपये से बढ़ाकर 25 फीसदी या प्रति हजार 5,000 रुपये किया जायेगा।
बिना फिल्टर वाले 65 एमएम तक के सिगरेट पर शुल्क 200 रुपये प्रति हजार से बढ़ाकर 2,700 रुपये प्रति हजार और 65 से 70 एमएम तक पर 250 रुपये प्रति हजार से बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति हजार किया जायेगा। फिलटर वाले सिगरेट पर अभी लंबाई के हिसाब से 440 रुपये प्रति हजार से 735 रुपये प्रति हजार तक उत्पाद शुल्क का प्रावधान है। इसे बढ़ाकर तीन हजार रुपये से 11 हजार रुपये प्रति हजार स्टिक तक करने का प्रस्ताव है।
तंबाकू के विकल्प वाले सिगरेट, चुरुट आदि पर भी शुल्क में भारी वृद्धि का प्रस्ताव है। चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर कर की दर 25 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने का प्रस्ताव किया गया है। अन्य उत्पादों पर भी शुल्क में भारी वृद्धि का प्रावधान विधेयक में रखा गया है।
जीएसटी में बीड़ी पर कर की दर 18 प्रतिशत रखी गयी है। वहीं, पान मसाला, विनिर्मित तंबाकू, सिगार, चुरूट, सिगारिलो और सिगरेट पर 40 प्रतिशत कर लगेगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम भी 01 फरवरी से प्रभाव में आ जायेगा। इसके तहत पान-मसाला संयंत्रों पर विशेष उपकर लगाया जायेगा। यह उपकर पान-मसाला के उत्पादन और पैकेजिंग की मशीन की क्षमता के आधार पर लगाया जायेगा। जहां हाथों से पैकेजिंग होती है वहीं भी निश्चित उपकर लगाया जायेगा।
इससे संबंधित विधेयकों को संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में मंजूरी मिली थी।
साख निर्धारक एवं बाजार अध्ययन एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, कर, शुल्क एवं अधिभारों के कारण अगले वित्त वर्ष में सिगरेट की बिक्री में छह से आठ प्रतिशत की गिरावट की संभावना है। उसने कहा है कि 01 फरवरी से हर स्टिक पर 2.05 रुपये से 8.5 रुपये का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जायेगा। यह सिगरेट स्टिक की लंबाई के हिसाब से अलग-अलग होगा। अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 65 सेमी से बड़े स्टिक के लिए 3.6 रुपये से 8.5 रुपये के बीच होगा। वहीं, 65 सेमी से छोटे सिगरेट पर 2.05 से 2.10 रुपये प्रति स्टिक का शुल्क लगेगा। इसके अलावा अंतिम मूल्य पर जीएसटी की दर भी बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी जायेगी।
क्रिसिल का कहना है कि 65 सेमी से छोटे सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क कम है, लेकिन कंपनियां इस श्रेणी में अधिक से अधिक बोझ खुद वहन करना चाहेंगी क्योंकि इसी श्रेणी के उपभोक्ता मूल्य के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। इससे उनका परिचालन लाभ दो से तीन प्रतिशत तक कम हो सकता है, हालांकि फिर भी इसका स्तर अच्छा बना रहेगा।
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